एक शिकायत की सजा,,पल्स पोलियो ड्यूटी से हटाई गई मितानिन ..... जनहित में आवाज उठाने पर प्रताड़ना का आरोप,,,,,,,,,,,मितानिन संगठन ने कलेक्टर कोरिया से जांच की मांग की,, दिया ज्ञापन,,,,,,




नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

कोरिया चरचा कालरी.....देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने की दिशा में पल्स पोलियो अभियान स्वास्थ्य विभाग की सबसे महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक योजनाओं में से एक है। इस अभियान के अंतर्गत 0 से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दवा पिलाना अनिवार्य होता है, ताकि किसी भी मासूम को आजीवन शारीरिक विकलांगता जैसी गंभीर समस्या से बचाया जा सके। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है और इसके सफल क्रियान्वयन में मितानिनों की भूमिका रीढ़ मानी जाती है।इसी अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान के दौरान 20 दिसंबर को नगर पालिका शिवपुर-चरचा में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई, जिसने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाया बल्कि बच्चों के मौलिक स्वास्थ्य अधिकारों को भी प्रभावित किया।

ड्यूटी से वंचित की गई मितानिन, बच्चे रह गए पोलियो ड्रॉप से दूर......जानकारी के अनुसार, पूर्व वर्षों में पल्स पोलियो अभियान के दौरान नगर पालिका शिवपुर-चर्चा की सभी 15 मितानिनों की ड्यूटी अनिवार्य रूप से लगाई जाती थी, किंतु इस बार स्थानीय प्रभारी द्वारा 21, 22 और 23 दिसंबर को पल्स पोलियो अभियान में केवल 14 मितानिनों की ड्यूटी लगाई गई, जबकि वार्ड क्रमांक 8 की मितानिन श्रीमती शिल्पा शर्मा की ड्यूटी जानबूझकर नहीं लगाई गई।इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि संबंधित वार्ड में पोलियो केंद्र नहीं लगाया गया और वार्ड क्रमांक 8 के कई मासूम बच्चे उस दिन पोलियो ड्रॉप पीने से वंचित रह गए। वार्डवासियों ने स्वयं मितानिन को सूचना दी कि उनके क्षेत्र में केंद्र नहीं लगा और बच्चों को दवा नहीं पिलाई गई। 22 दिसंबर को प्रभारी द्वारा  वार्ड क्रमांक आठ के क्षेत्र अंतर्गत  मात्र स्टाफ कॉलोनी में ही घर-घर जाकर पोलियो ड्राप पिलाने के लिए दूसरे लोगों की ड्यूटी लगाई गई जिनके  द्वारा सिर्फ स्टाफ कॉलोनी में ही पोलियो ड्राप पिलाया गया जबकि बी टाइप व ऑफीसर कॉलोनी के बच्चे पोलियो के दवा पीने से वंचित रह जाए

शिकायत पर प्रतिशोध लेने का गंभीर आरोप........मितानिन श्रीमती शिल्पा शर्मा ने बताया कि उन्होंने पूर्व में जिला अस्पताल एवं स्वास्थ्य विभाग में हुई एक गंभीर लापरवाही की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी थी, जिस पर जांच के आदेश भी हुए थे। उनका आरोप है कि इसी शिकायत से नाराज होकर स्थानीय प्रभारी ब्रज साहू द्वारा उन्हें पल्स पोलियो ड्यूटी से हटाया गया, जो कि न केवल व्यक्तिगत प्रताड़ना है बल्कि जनहित के कार्य में बाधा भी है।

28 नवंबर 2025 को एक गर्भवती महिला को नगर पालिका शिवपुर चर्चा के वार्ड क्रमांक 6 स्थित शहरी उप-स्वास्थ्य केंद्र में बिना चिकित्सक की निगरानी के लंबे समय तक रखा गया। उसे दौरान ब्रिज साहू की पत्नी जो कि जिला चिकित्सालय में नर्स है उसे नगर पालिका शिवपुर चर्चा के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी पर लगाया गया है घटना दिवस राहु की पत्नी बृज साहू की पत्नी उप स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी में थी, प्रसव से पीड़ित वार्ड क्रमांक 9 की महिला का प्रथम प्रसव था, स्वास्थ्य केंद्र में उपस्थित स्टाफ को यह मालूम था की डॉक्टर की उपस्थिति में किसी भी महिला का प्रथम प्रसव उप स्वास्थ्य केंद्र में नहीं कराया जा सकता, ऐसे केस को तत्काल जिला अस्पताल भेजना चाहिए, यह सब जानकारी होने के बावजूद समय रहते रेफर नहीं किया गया, जिसके चलते नवजात शिशु की दुखद मृत्यु हो गई और महिला की स्थिति भी गंभीर हो गई। महिला की बिगड़ती स्थिति को देखकर नर्सो ने जिला चिकित्सालय ले जाने की सलाह दी जिस पर परेशान परिजनों ने तत्काल जिला अस्पताल में जाकर महिला को भर्ती किया ,दो दिनों तक चले इलाज के पश्चात महिला की जान बचाई जा सकी। श्रीमती शिल्पा शर्मा का आरोप है कि उन्होंने पूर्व में शहरी उप स्वास्थ्य केंद्र भूमि गंभीर चिकित्सी लापरवाही की शिकायत स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से की थी जिस पर जांच के आदेश भी जारी हुए थे इसी शिकायत से नाराज होकर ब्रिज साहू द्वारा प्रतिशोध स्वरूप पल्स पोलियो ड्यूटी से हटाया गया जो कि कानूनन अपराध की श्रेणी में आताहै

इस पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ मितानिन नागरिक जागरूक संस्था एवं अन्य मितानिनों ने कलेक्टर कोरिया को ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई तथा भविष्य में पल्स पोलियो जैसे अभियानों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न होने की ठोस व्यवस्था की मांग की है। मितानिन रूबी विश्वकर्मा, रशीदा , सुल्ताना, रामकली शालिनी, कमलेश्वरी ,रेखा ,लोचनी, बबली राजवाड़े ,निरूपा ,फूल कुंवर आदि मितानिनों का कहना है कि एक बूंद पोलियो की दवा बच्चे को जिंदगी भर की विकलांगता से बचाती है, ऐसे में व्यक्तिगत द्वेष या प्रशासनिक मनमानी के कारण किसी भी बच्चे को इस सुरक्षा से वंचित करना अक्षम्य अपराध है।

अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील एवं गंभीर मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए दोषियों पर कार्रवाई करता है या नहीं। क्योंकि पल्स पोलियो केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हर बच्चे के स्वस्थ भविष्य का संकल्प है। एक बूंद पोलियो की दवा बच्चों को जीवन भर की विकलांगता से बचाती है व्यक्तिगत द्वेष या मनमानी के कारण किसी बच्चे को इससे वंचित करना कानून और मानवता दोनों के विरुद्ध है। 



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