कोरिया जिले का गौरवशाली इतिहास और अद्भुत प्राकृतिक धरोहर


कोरिया बैकुंठपुर / छत्तीसगढ़ के उत्तरी अंचल में स्थित कोरिया जिला अपनी ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध रहा है। वर्तमान कोरिया एवं मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिला, अतीत में 17वीं शताब्दी के दौरान ‘कोणया राज्य’ के नाम से जाना जाता था। उस समय इस राज्य की राजधानी कोणया गढ़ नामक पहाड़ी पर स्थित थी, जो सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था।

अंग्रेजी शासन के दौरान जब स्थानीय नामों का अंग्रेजीकरण किया जाने लगा, तब ‘कोणया’ को अंग्रेज अधिकारियों द्वारा ‘कोरिया’ लिखना शुरू किया गया। इसी काल में चिरमी, धवलपुर नगर, सोनहत और बैकुंठपुर क्रमशः क्षेत्रीय प्रशासन की प्रमुख बैठकों और गतिविधियों के केंद्र बने। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कोरिया, तत्कालीन सिरगुजा रियासत का हिस्सा होते हुए सरगुजा जिले में सम्मिलित कर दिया गया।

वर्ष 1998 में प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण, विस्तृत भू-भाग और बढ़ती जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए सरगुजा से अलग कर ‘पश्चिम सरगुजा’ नाम से एक नए जिले का निर्माण किया गया। उस समय मध्यप्रदेश राज्य के अंतर्गत स्थापित यह जिला बाद में छत्तीसगढ़ गठन के उपरांत ‘कोरिया जिला’ के रूप में जाना जाने लगा। इस जिले में प्रारंभ में पाँच विकासखंड—बैकुंठपुर, सोनहत, खड़गवां, मनेंद्रगढ़ और भरतपुर—शामिल थे।

समय के साथ प्रशासनिक सुविधा और स्थानीय जनसुविधाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से कोरिया जिले का पुनर्गठन किया गया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) को अलग जिला का दर्जा प्रदान किया गया। वर्तमान में कोरिया और एमसीबी दोनों जिले प्राकृतिक संसाधनों, सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

इन जिलों की अर्थव्यवस्था में वनोपज, कृषि और कोयला प्रमुख आय के स्रोत रहे हैं। घने वन, खनिज संपदा और उपजाऊ भूमि इस क्षेत्र को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाते हैं। कोरिया की प्राकृतिक सुंदरता कभी भी नैनीताल की पहाड़ियों से कम नहीं मानी जाती। ऊंचे-ऊंचे पर्वत, घने जंगल, जलप्रपात और प्राचीन धरोहरें इसे पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र बनाती हैं।

धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की बात की जाए तो कोरिया और एमसीबी अंचल में मां चांग देवी, कंकाली देवी, गड़ा दाई, रामदैया माता, गागी रानी, दुर्गा धाम और महामाया की पवित्र स्थली महत्वपूर्ण हैं। साथ ही अनेक देव-स्थानों की प्राचीनता और जनमान्यता इन क्षेत्रों की सांस्कृतिक आस्था को और गहराई प्रदान करती है।

प्राकृतिक स्थलों में रामदाहा, चयूल, गौर घाट, अमृतधारा और रामधारा जलप्रपात दर्शनीय स्थलों की प्रमुख श्रेणी में आते हैं, जहाँ प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक और प्रकृति प्रेमी पहुंचते हैं। यह क्षेत्र रोमांचक पर्यटन, परिवारिक भ्रमण और आध्यात्मिक शांति का एक अद्वितीय मिश्रण प्रदान करता है।

कोरिया और एमसीबी की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इसे छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण जिलों में शामिल करती है। यह क्षेत्र न केवल प्रकृति की गोद में बसे सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि हजारों वर्षों की सामाजिक-सांस्कृतिक प्रगति का जीता-जागता इतिहास भी है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ