पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बैकुंठपुर क्षेत्र की बड़ी पहल ...... चरचा क्षेत्रीय अस्पताल में 15 KLD अपशिष्ट उपचार संयंत्र का शुभारंभ.....



नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

कोरिया चरचा कालरी....... एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र अंतर्गत चरचा कालरी स्थित क्षेत्रीय अस्पताल में पर्यावरण संरक्षण को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। अस्पताल परिसर में 15 केएलडी (किलो लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाले अपशिष्ट उपचार संयंत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि बी.एन. झा, मुख्य महाप्रबंधक, बैकुंठपुर क्षेत्र के कर-कमलों द्वारा किया गया।

इस अवसर पर डॉ. संजय सिंह (मुख्य चिकित्सा अधिकारी, क्षेत्रीय चिकित्सालय, डॉ. एस .मिंज उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी, राम सिंह मीणा स्टाफ ऑफिसर सिविल,सुरेश राम क्षेत्र प्रबंधक कटकोना,योगेंद्र राठिया स्टाफ ऑफिसर प्रोजेक्ट एंड प्लानिंग,भक्त बंधु दास स्टाफ ऑफिसर इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल,गौरव दुबे कार्मिक प्रबंधक, बैकुंठपुर क्षेत्र, डॉ साक्षी साहू डॉक्टर सुची ,ददन राम उप कार्मिक अधिकारी, चरचा माइन, हीरा सिंह, श्रीमती रामकली पाल पार्षद नगर पालिका शिवपुर चर्चा दीपा विश्वकर्मा मंडल अध्यक्ष शिवपुर चर्चा, काजल मोदी ,श्रम संघ प्रतिनिधि सुषील शर्मा, रियाज अहमद, अशोक निर्मलकर क्षेत्रीय चिकित्सालय के प्रभात शर्मा,अशफाक अंसारी सहित बैकुंठपुर क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी, एरिया जेसीसी, यूनिट  जेसीसी ,वेलफेयर बोर्ड के सदस्य उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि लगभग 50 वर्ष पूर्व स्थापित क्षेत्रीय चिकित्सालय, चरचा में पहली बार वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली शुरू की गई है। इस संयंत्र की कुल लागत लगभग 30 लाख रुपये बताई गई है। संयंत्र के संचालन से अस्पताल से निकलने वाले दूषित जल एवं अन्य अपशिष्ट का विभिन्न चरणों में उपचारकर पुनः उपयोग योग्य जल प्राप्त किया जाएगा, जिसका प्रयोग अस्पताल परिसर एवं आसपास के गार्डन व हरित क्षेत्रों में किया जाएगा। चर्चा क्षेत्र में खदान से प्रतिदिन निकलने वाले लगभग एक लाख लीटर दूषित पानी के उपचार हेतु एसिटिक वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट व नालियों से निकलने वाले दूषित जल के उपचार हेतु सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी संचालित है


मुख्य महाप्रबंधक बी.एन. झा ने इस अवसर पर कहा कि,यह अपशिष्ट उपचार संयंत्र न केवल जल प्रबंधन और जल संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएगा। अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में इस प्रकार की व्यवस्था से स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण—तीनों को लाभ मिलेगा।

संयंत्र से निकलने वाले ठोस अपशिष्ट का उपयोग खाद (कम्पोस्ट)के रूप में किया जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की अनुपयोगिता पाई जाती है, तो उसे वैज्ञानिक विधि से गड्ढा बनाकर सुरक्षित रूप से निस्तारित किया जाएगा।

निश्चित रूप से, एस  ई सी एल बैकुंठपुर क्षेत्र द्वारा की गई यह पहल सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार औद्योगिक संचालन*का एक अनुकरणीय उदाहरण है, जो आने वाले समय में अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।

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