बाल मधुमेह की पहचान एवं प्रबंधन पर जिले में दो दिवसीय प्रशिक्षण


बिलासपुर, छत्तीसगढ़। जिला स्वास्थ्य विभाग, बिलासपुर द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) की समय पर पहचान, प्रबंधन एवं रेफरल व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 24 एवं 25 सितंबर 2026 को बिलासपुर  जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। 

प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों एवं कार्यक्रमों से जुड़े कुल 245 स्वास्थ्यकर्मियों एवं प्रशिक्षकों को चार सत्रों में प्रशिक्षित किया गया। 

कार्यक्रम में जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ शुभा गरेवाल, कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री प्यूली मजूमदार, जिला नोडल अधिकारी (एनसीडी) डॉ. बी.के. वैष्णव, तथा डॉ. रमन जोगी, शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल बिलासपुर नैदानिक सहयोग दिया|

प्रशिक्षण के लिए, पहले और दूसरे बैच में विकासखंड सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी  शामिल हुए। तीसरे बैच में बीईटीओ, एरिया समन्वयक, ब्लॉक समन्वयक एवं मितानिन प्रशिक्षक सहित चतुर्थ बैच में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी, ग्रामीण चिकित्सा सहायक, आयुष चिकित्सा अधिकारी एवं चिरायु चिकित्सा अधिकारी शामिल रहे। 

प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता को सुदृढ़ करना था, ताकि वे बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान, रक्त शर्करा की जांच के लिए उचित मार्गदर्शन, समय पर रेफरल तथा आगे के उपचार एवं फॉलो-अप में प्रभावी भूमिका निभा सकें।

प्रशिक्षण के दौरान बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के प्रमुख लक्षणों, जैसे अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, वजन कम होना, अत्यधिक कमजोरी एवं थकान आदि की पहचान पर विशेष जोर दिया गया। स्वास्थ्यकर्मियों को बताया गया कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बच्चे की समय पर जांच कराना आवश्यक है, जिससे बीमारी की शीघ्र पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

प्रशिक्षण में टाइप-1 डायबिटीज की गंभीर आपातकालीन स्थिति डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) के प्रति भी प्रतिभागियों को संवेदनशील किया गया। तेज अथवा गहरी सांस, उल्टी, पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी, निर्जलीकरण या बेहोशी जैसे गंभीर लक्षणों की स्थिति में बच्चे को तत्काल उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफर करने के महत्व पर चर्चा की गई।

इसके साथ ही समुदाय में प्रचलित भ्रांतियों को दूर करने तथा अभिभावकों एवं परिवारों को टाइप-1 डायबिटीज के संबंध में सही जानकारी देने पर भी जोर दिया गया। स्वास्थ्यकर्मियों को बताया गया कि समय पर पहचान, नियमित इंसुलिन उपचार, रक्त शर्करा की निगरानी, संतुलित आहार एवं नियमित फॉलो-अप के माध्यम से टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चे स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।

कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ गजेंद्र सिंह स्वास्थ्य विशेषज्ञ यूनिसेफ के द्वारा तथा उनकी टीम तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया। विशेषज्ञों ने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में बाल मधुमेह के प्रति समुदाय, अभिभावकों एवं परिवारों को जागरूक करें। साथ ही संभावित मामलों की शीघ्र पहचान कर बच्चों की रक्त शर्करा जांच, समय पर उपचार तथा उचित स्वास्थ्य संस्थान में रेफरल सुनिश्चित करें।

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