छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी हसदेव के उद्गम स्थल पर ‘आशीर्वाद का दीया’, रोशनी से जगमगाया मेन्द्रा कोरियावासियों ने नदी, तालाब और जलस्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन का लिया संकल्प


कोरिया बैकुंठपुर। सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले में पर्यावरण एवं जल संरक्षण को लेकर जनभागीदारी का अनूठा संदेश देखने को मिला। इसी कड़ी में जिलेभर में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से जिलेवासियों ने नदी, तालाब सहित सभी प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान हसदेव नदी के उद्गम स्थल सोनहत विकासखंड के ग्राम मेन्द्रा में भी बड़ी संख्या में दीप प्रज्ज्वलित किए गए। जैसे ही दीपों से उद्गम स्थल रोशन हुआ, पूरा क्षेत्र दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने जलस्रोतों को स्वच्छ रखने, उनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।


जल संरक्षण के प्रति जनभागीदारी का संदेश

‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम केवल दीप प्रज्ज्वलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से जल, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का सामाजिक संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम में लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि नदियां और तालाब केवल जल के स्रोत नहीं हैं, बल्कि इनके साथ क्षेत्र की पारिस्थितिकी, कृषि, वन्यजीवन और जनजीवन भी जुड़ा हुआ है।

हसदेव नदी को छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण नदियों में माना जाता है और इसके उद्गम स्थल को लेकर लोगों में विशेष आस्था एवं पर्यावरणीय महत्व की भावना है। ऐसे में ग्राम मेन्द्रा में दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से जलस्रोतों के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना को सार्वजनिक रूप से अभिव्यक्त किया गया।

घर-घर जले दीये, अभियान से जुड़े जिलेवासी

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने अपने घरों, दुकानों और सार्वजनिक स्थलों पर दीये जलाकर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में सहभागिता निभाई। जनभागीदारी के इस स्वरूप ने कार्यक्रम को व्यापक रूप दिया।

कार्यक्रम के दौरान लोगों ने जलस्रोतों में गंदगी नहीं फैलाने, नदी-तालाबों को स्वच्छ रखने तथा जल के संरक्षण के लिए अपने स्तर पर प्रयास करने का संदेश दिया। लोगों का कहना रहा कि जल संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए जल बचाने का संकल्प

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि आज जलस्रोतों का संरक्षण किया जाएगा, तभी आने वाली पीढ़ियों को पर्याप्त और स्वच्छ जल उपलब्ध हो सकेगा। लगातार बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों के बीच नदी, तालाब, कुएं और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण समय की आवश्यकता है।

‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम ने सेवा, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को एक साथ जोड़ते हुए जिलेवासियों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया। हसदेव के उद्गम स्थल मेन्द्रा में जलाए गए दीप इस संकल्प के प्रतीक बने कि प्राकृतिक जलस्रोतों की रक्षा केवल एक अभियान नहीं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी है।

दीपों की रोशनी से जगमगाया हसदेव का उद्गम स्थल इस संदेश का साक्षी बना कि जल है तो जीवन है और जलस्रोतों का संरक्षण ही भविष्य की सुरक्षा है।

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