नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कालरी,,,,,,जिस खतरे को लेकर लगातार आगाह किया जा रहा था, आखिरकार वही हुआ। नेशनल हाईवे से नगर पालिका शिवपुर-चर्चा को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण पुलिया धंस गई और इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से स्कूल बसों के पहिए थम गए हैं, जिसके चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं चर्चा में दैनिक उपयोग की सामग्री और रसद लेकर आने वाले वाहन भी रास्ते में खड़े हो गए हैं।सबसे गंभीर बात यह है कि इस संकट की आशंका पहले से थी। पुलिया और सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर समाचार पत्रों के माध्यम से जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन, स्थानीय कलरी प्रबंधन तथा नगर पालिका प्रबंधन को लगातार अवगत कराया गया था।** बावजूद इसके समय रहते किसी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब पुलिया धंसने के बाद करीब 25 हजार की आबादी को इसका सीधा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
पुलिया की जर्जर स्थिति को लेकर पूर्व में प्रकाशित समाचारों में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि सड़क कई इंच नीचे धंस चुकी है और भारी वाहनों की आवाजाही से स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
आज वही सड़क और पुलिया पूरी तरह जवाब दे चुकी है। सवाल यह है कि यदि समय रहते मरम्मत कर दी जाती तो क्या आज चर्चा के नागरिकों को इस परेशानी का सामना करना पड़ता।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार पुलिया की दुर्दशा का प्रमुख कारण चरचा कालरी से होने वाला भारी कोयला परिवहन है। कोयला लेकर चलने वाले भारी वाहन कथित तौर पर 60 से 70 टन तक भार लेकर इस पुलिया से गुजरते रहे हैं।दूसरी ओर पुलिया के नीचे किसी मजबूत कंक्रीट संरचना के बजाय सीमेंट पाइपों के माध्यम से पानी की निकासी की व्यवस्था* है। ऐसे में लगातार भारी वाहनों के दबाव और पानी के बहाव ने सड़क एवं पुलिया की संरचना को कमजोर कर दिया।
इस पुलिया से नेशनल हाईवे के किनारे का लगभग दो किलोमीटर क्षेत्र का वर्षाजल भी निकलता है। यानी पुलिया पर एक ओर भारी वाहनों का दबाव रहा और दूसरी ओर बरसात के पानी का लगातार बहाव। यही वजह है कि समय रहते इसकी तकनीकी जांच और मजबूतीकरण जरूरी था।
अब पुलिया धंस जाने के बाद यदि दोबारा तेज बारिश होती है तो स्थिति और विकट होने की आशंका है। जल निकासी बाधित होने के साथ सड़क के और अधिक कटाव तथा आसपास के हिस्से के प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
स्कूल बसें खड़ीं, बच्चे हुए प्रभावित,,,,,पुलिया के धंसने का सबसे तत्काल असर हजारों स्कूली बच्चों पर पड़ा है। इस मार्ग से आवागमन करने वाली स्कूल बसों को रुकना पड़ा है* जिससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लेकर आने वाले वाहनों के रुक जाने से स्थानीय व्यापार और नागरिकों की आवश्यक आपूर्ति पर भी असर पड़ने लगा है।
पुलिया धंसने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसकी जिम्मेदारी कौन लेगाक्या भारी कोयला परिवहन करने वाले वाहनों की आवाजाही के अनुपात में सड़क और पुलिया की क्षमता का कभी तकनीकी आकलन किया गया? क्या पुलिया की स्थिति की नियमित जांच की गई? जब खतरे की सूचना पहले ही सार्वजनिक रूप से दी जा चुकी थी, तब जिम्मेदारों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब दोषारोपण से अधिक जरूरी तत्काल वैकल्पिक आवागमन और स्थायी समाधान है। जिला प्रशासन रेलवे, SECL/कलरी प्रबंधन, नगर पालिका तथा संबंधित तकनीकी विभागों की संयुक्त टीम भेजकर मौके का निरीक्षण कराना चाहिए और पुलिया के पुनर्निर्माण अथवा सुदृढ़ीकरण की तत्काल कार्ययोजना बनानी चाहिए।
लापरवाही की कीमत जनता क्यों चुकाए,,,,,,चरचा के नागरिकों का कहना है कि जब पुलिया की जर्जर स्थिति पहले से सामने थी और समाचार पत्रों के माध्यम से जिम्मेदारों को आगाह भी किया जा चुका था, तो फिर कार्रवाई का इंतजार क्यों किया गया? अब पुलिया धंस चुकी है, रास्ता बंद है और जनता परेशान है।
यह सोच का विषय है कि जब खतरा दिखाई दे रहा था, तब जिम्मेदार क्यों नहीं जागे? और अब जब पुलिया धंस गई, तो क्या किसी जिम्मेदार की जवाबदेही तय होगी?25 हजार नागरिकों की लाइफलाइन को तत्काल बहाल करना अब प्राथमिकता होनी चाहिए।




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