कोरिया बैकुंठपुर। शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को बदलने की सबसे बड़ी शक्ति है। इसी विचार को अपने कार्यों में चरितार्थ करते हुए कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड की दो शिक्षिकाएं—शासकीय जनपद कन्या प्राथमिक शाला बैकुंठपुर की प्रधान पाठक पूनम पाण्डेय एवं पीएम श्री शासकीय प्राथमिक शाला बुड़ार की सहायक शिक्षिका जया मिश्रा—शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण, नवाचार और सफलता की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।
सीमित संसाधनों में शुरू किया शिक्षा का सफर
प्रधान पाठक पूनम पाण्डेय का शिक्षक जीवन 5 जुलाई 2008 से प्रारंभ हुआ। उनकी पहली नियुक्ति शासकीय प्राथमिक शाला धौरीटिकरा, विकासखंड बैकुंठपुर में सहायक शिक्षक के रूप में हुई। विद्यालय में सीमित संसाधन और अनेक चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने बच्चों की शिक्षा को किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होने देने का संकल्प लिया। नवाचार आधारित शिक्षण, प्रिंट-रिच वातावरण, शैक्षणिक भ्रमण, जनसहयोग, स्वच्छता अभियान, पौधरोपण और सुंदर बागवानी जैसे कार्यों के माध्यम से विद्यालय के शैक्षणिक एवं भौतिक वातावरण में सकारात्मक बदलाव लाया। बच्चों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और संस्कार विकसित करने के लिए सांस्कृतिक एवं देशभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।
उनके कार्यों और अनुभव को देखते हुए 11 अगस्त 2024 को उन्हें शासकीय जनपद कन्या प्राथमिक शाला बैकुंठपुर में प्रधान पाठक के रूप में पदोन्नति मिली। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण, जिला प्रशासन प्रशस्ति पत्र, संपूर्णता अभियान प्रशस्ति पत्र, शून्य निवेश नवाचार प्रशस्ति पत्र, खेल एवं युवा विभाग प्रमाण-पत्र सहित स्वतंत्रता दिवस उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान जैसे अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
जया मिश्रा ने संवेदनशीलता और नवाचार से बदली शिक्षा की तस्वीर
शिक्षिका जया मिश्रा का शिक्षक जीवन 10 अक्टूबर 2006 को प्रारंभ हुआ। उनकी पहली नियुक्ति तत्कालीन कोरिया जिले के भरतपुर विकासखंड के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्र स्थित नवीन प्राथमिक शाला पटपरिहापारा में सहायक शिक्षिका के रूप में हुई। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बच्चों की सीखने की इच्छा ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
वर्ष 2012 से पीएम श्री शासकीय प्राथमिक शाला बुड़ार में कार्यरत जया मिश्रा ने खेल-खेल में शिक्षा, नवाचार आधारित शिक्षण, प्रिंट-रिच वातावरण, जनसहयोग, पौधरोपण और बागवानी जैसे प्रयासों से विद्यालय को बेहतर बनाने का कार्य किया। “एक दीप शहीदों के नाम” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में देशभक्ति और अच्छे संस्कार विकसित करने का प्रयास किया। उनके मार्गदर्शन में लगातार हर वर्ष विद्यार्थियों का चयन नवोदय विद्यालय में होता रहा है।
उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें वर्ष 2020 में जिला प्रशासन प्रशस्ति पत्र, 2023-24 में मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण (शिक्षा दूत पुरस्कार), 2024 में जिला स्तरीय विद्या वैभव ओलंपियाड सम्मान तथा 2025 में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान प्रदान किया गया।
दोनों शिक्षिकाओं का मानना है कि सम्मान केवल मंजिल नहीं, बल्कि और अधिक समर्पण तथा बेहतर कार्य करने की प्रेरणा है। उनके नवाचार और शिक्षा के प्रति समर्पण से यह संदेश मिलता है कि एक शिक्षक ठान ले तो सीमित संसाधनों में भी बच्चों के सपनों को नई उड़ान देकर समाज का भविष्य बदल सकता है।

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