नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
चरचा कालरी.....नगर पालिका शिवपुर-चर्चा के वार्ड क्रमांक 15 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की बदहाल स्थिति ने नन्हे-मुन्ने बच्चों की सुरक्षा और नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते करीब आठ महीनों से आंगनबाड़ी केंद्र का भवन निर्माणाधीन है और इस अवधि में केंद्र का संचालन एक निजी मकान के बगल में बने छोटे से खुले शेड में किया जा रहा है। बारिश के इस मौसम में स्थिति और भी विकट हो गई है। चारों ओर पानी भरा रहने के बावजूद बच्चों को इसी अस्थायी व्यवस्था में बुलाकर आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किया जा रहा है।
एक ही शेड में खाना भी बनता है और बच्चे भी बैठते हैं......अस्थायी शेड की जगह इतनी सीमित है कि एक ओर आंगनबाड़ी सहायिका द्वारा बच्चों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, वहीं दूसरी ओर मासूम बच्चे उसी छोटे से स्थान में बैठने को मजबूर हैं। बारिश के दौरान आसपास पानी जमा हो जाने से बच्चों को आने-जाने में भी परेशानी होती है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि इस अस्थायी केंद्र में शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं है और बच्चों को शौच के लिए दूसरे के घर पर निर्भर रहना पड़ता है।मासूम बच्चों की इस परेशानी के बावजूद निर्माण कार्य पूरा नहीं होना व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
आठ महीने पहले खाली कराया भवन, फिर भी निर्माण अधूरा....... सूत्रों के अनुसार आंगनबाड़ी भवन में निर्माण कार्य किया जाना था, जिसके लिए करीब आठ महीने पहले ही भवन खाली करा लिया गया था। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन कथित तौर पर बेहद धीमी गति से चलने के कारण आज तक पूरा नहीं हो सका है।सामान्य तौर पर प्रत्येक निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाना होता है, लेकिन इस आंगनबाड़ी भवन के निर्माण में इतनी लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी कार्य अधूरा पड़ा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर संबंधित ठेकेदार को निर्माण पूरा करने की समय-सीमा और गुणवत्ता को लेकर कितनी छूट दी गई है और इसकी निगरानी किस स्तर पर की जा रही है। ठेकेदार को इतनी ज्यादा छूट देने की वजह आखिर क्या है अधूरे निर्माण के साथ-साथ भवन में किए जा रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, आंगनबाड़ी भवन की सेड में मात्र 1.5 इंच व्यास के लगभग 20 फीट लंबे पतले पाइप लगाए गए हैं। आरोप है कि इन पाइपों का वजन भी बेहद कम है और पर्याप्त मजबूती के लिए आवश्यक सपोर्ट नहीं दिया गया है। यदि तेज हवा चली तो निश्चित तौर पर किसी भी अपनी घटना की संभावना को नकारा नहीं जा सकता भवन परिसर में लगाए गए टाइल्स की स्थिति भी बेहद सोचनीय है। बिना उपयोग के कई स्थानों पर टाइल्स में दरारें स्पष्ट दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टाइल्स के नीचे पर्याप्त आधार नहीं होने के कारण उन्हें थपथपाने पर अलग तरह की आवाज आने की शिकायत है। यदि निर्माण सामग्री और टाइल्स की गुणवत्ता वास्तव में मानकों के अनुरूप नहीं है, तो भविष्य में इनके टूटने और बच्चों के लिए दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है।आंगनबाड़ी के संचालन के लिए बनाए गए शेड की छत को लेकर भी सुरक्षा संबंधी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस शेड में पाइपों का सपोर्ट काफी दूरी पर लगाया गया है और ऊपर लगाई गई शीट भी अपेक्षाकृत पतली है। क्षेत्र में बंदरों की अधिक संख्या को देखते हुए यह चिंता जताई जा रही है कि यदि कोई बंदर छत पर कूदता है या तेज हवा चलती है, तो कमजोर संरचना क्षतिग्रस्त हो सकती है।
ऐसी स्थिति में बच्चों की मौजूदगी के दौरान कोई दुर्घटना होने पर इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल है।
आंगनबाड़ी केंद्रों का उद्देश्य छोटे बच्चों को सुरक्षित वातावरण में पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और देखभाल उपलब्ध कराना है। लेकिन वार्ड क्रमांक 15 में जिस तरह बच्चों को महीनों से अस्थायी और सीमित व्यवस्था में बैठाया जा रहा है, वह व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्माण कार्य में देरी और कथित गुणवत्ता संबंधी कमियों का खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में पानी से घिरे अस्थायी केंद्र में बच्चों को बैठाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता है
नगर पालिका शिवपुर-चरचा की नवनियुक्त मुख्य नगर पालिका अधिकारी को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर आंगनबाड़ी भवन के निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री, निर्माण की तकनीकी मजबूती और कार्य पूर्ण करने की निर्धारित समय-सीमा की जांच करानी चाहिए।
साथ ही संबंधित तकनीकी अधिकारियों से भवन और शेड की सुरक्षा का निरीक्षण कराकर यदि निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता अथवा गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो जिम्मेदार ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।मासूम बच्चों की सुरक्षा किसी भी निर्माण कार्य से अधिक महत्वपूर्ण है। यदि निर्माण कार्य में लापरवाही के कारण भविष्य में कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा। इसलिए किसी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय नगर पालिका प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्चों के लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त आंगनबाड़ी केंद्र उपलब्ध कराना चाहिए।




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