कोरिया बैकुंठपुर । विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के अवसर पर विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, पढ़ाई एवं परीक्षा से जुड़े तनाव को समझने तथा भावनात्मक संकट की स्थिति में समय पर सहायता लेने के उद्देश्य से कोरिया जिले के चार विद्यालयों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के साथ-साथ नकारात्मक विचारों और भावनात्मक परेशानियों से स्वस्थ तरीके से निपटने के उपायों की जानकारी दी गई।
जागरूकता कार्यक्रमों की शुरुआत 9 सितंबर 2026 को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैकुंठपुर से हुई। इसके बाद 10 सितंबर को शासकीय उच्च विद्यालय कोशमपारा, आनी, 11 सितंबर को स्वामी आत्मानंद शासकीय हिंदी उत्कृष्ट विद्यालय खरवत तथा 12 सितंबर को स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश स्कूल महलपारा, बैकुंठपुर में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह के आदेशानुसार तथा सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल प्रबंधक डॉ. आयुष जायसवाल, जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री अशरफ अंसारी एवं जिला मानसिक स्वास्थ्य नोडल अधिकारी डॉ. कार्तिकेय सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के दौरान क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. सुमन कुमार ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
परीक्षा और पढ़ाई के तनाव को समझना जरूरी
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को परीक्षा एवं पढ़ाई से संबंधित तनाव, भावनात्मक उतार-चढ़ाव, नकारात्मक विचारों तथा व्यक्तिगत समस्याओं से स्वस्थ तरीके से निपटने के संबंध में जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि जीवन में तनाव और कठिन परिस्थितियां आना सामान्य बात है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में अकेले परेशान होने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति से अपनी बात साझा करना महत्वपूर्ण है।
विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि मानसिक परेशानी को छिपाने अथवा उसे लेकर शर्म महसूस करने के बजाय अभिभावक, शिक्षक, मित्र, विश्वसनीय व्यक्ति या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बातचीत करनी चाहिए। समय पर बातचीत और उचित सहयोग से मानसिक तनाव एवं संकट की स्थिति को बेहतर ढंग से संभाला जा सकता है।
विद्यार्थियों से किया गया संवाद, जिज्ञासाओं का समाधान
कार्यक्रम को केवल व्याख्यान तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक चर्चा की गई। विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य, तनाव, भावनात्मक समस्याओं और व्यक्तिगत परिस्थितियों से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञ द्वारा सरल एवं सहज तरीके से समाधान किया गया।
इसके साथ ही विद्यार्थियों को अपने मित्रों एवं सहपाठियों के व्यवहार में होने वाले असामान्य बदलावों को समझने के लिए संवेदनशील बनाया गया। बताया गया कि यदि कोई साथी लगातार उदास दिखाई दे, लोगों से दूरी बनाने लगे, अत्यधिक तनाव में नजर आए या अपनी परेशानियों को लेकर लगातार चिंतित रहे तो उसकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। ऐसे समय में उसकी बात ध्यान से सुनना और आवश्यकता पड़ने पर अभिभावक, शिक्षक अथवा विशेषज्ञ तक बात पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना महत्वपूर्ण
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता, संवेदनशीलता तथा आवश्यकता पड़ने पर सहायता लेने की सकारात्मक प्रवृत्ति को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार शारीरिक बीमारी होने पर चिकित्सक से परामर्श लिया जाता है, उसी प्रकार मानसिक परेशानी होने पर भी विशेषज्ञ की सहायता लेने में किसी प्रकार का संकोच नहीं होना चाहिए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए जागरूकता, समय पर सहायता और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में विश्व स्तर पर “Changing the Narrative on Suicide – Start the Conversation” यानी आत्महत्या के बारे में बातचीत के तरीके को बदलते हुए संवाद शुरू करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर किसी भी प्रकार का संकोच या कलंक न रखें।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति लगातार निराशा, अत्यधिक तनाव अथवा भावनात्मक संकट में दिखाई दे तो उसकी बात को गंभीरता से सुनना चाहिए। उसे अकेला छोड़ने के बजाय सहयोग देना और आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य सेवा या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ तक पहुंचाना जरूरी है।
आत्महत्या रोकथाम में परिवार और समाज की भी अहम भूमिका
सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल प्रबंधक डॉ. आयुष जायसवाल ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें परिवार, विद्यालय, समाज और प्रत्येक व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। मानसिक परेशानी, तनाव अथवा भावनात्मक संकट से गुजर रहे व्यक्ति को अकेला छोड़ने के बजाय उसकी बात ध्यानपूर्वक सुनना और समय पर उचित सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए जिला चिकित्सालय में ओपीडी नंबर 9 में संपर्क किया जा सकता है, जहां आवश्यक परामर्श एवं सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
डिप्रेशन का इलाज संभव, समय पर लें विशेषज्ञ की मदद
जिला मानसिक स्वास्थ्य नोडल अधिकारी डॉ. कार्तिकेय सिंह ने बताया कि डिप्रेशन एक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, जिसका समय पर उपचार संभव है। उन्होंने कहा कि लगातार निराशा, उदासी अथवा भावनात्मक परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को जिला चिकित्सालय पहुंचकर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर उपचार और सहयोग मिलने से व्यक्ति अपनी स्थिति में सुधार कर सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है।
चारों विद्यालयों में आयोजित इन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि परेशानी को मन में दबाकर रखने के बजाय बातचीत करें, सहायता मांगें और दूसरों की परेशानी को भी संवेदनशीलता के साथ समझें। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस प्रकार के कार्यक्रमों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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