काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में शामिल हुए सांसद चिंतामणि महाराज, साहित्य एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश


वाराणसी। सरगुजा के सांसद एवं संत समाज के चिंतामणि महाराज  वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय के महामना सभागार में आयोजित श्री सीता जी साहित्य सृजन एवं संस्कृति रामायणी सम्मान एवं रामायण रिसर्च काउंसिल सम्मान समारोह में संतों के पावन सानिध्य में सम्मिलित हुए। इस गरिमामयी आयोजन में साहित्य, संस्कृति, कला एवं सनातन परंपराओं से जुड़े अनेक विशिष्टजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान सांसद चिंतामणि महाराज  ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए भगवान श्रीराम एवं माता सीता के आदर्शों और भारतीय संस्कृति में उनके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और लोककल्याण की प्रेरणा देता है, वहीं माता सीता भारतीय नारी शक्ति, धैर्य, त्याग और संस्कारों की अद्वितीय प्रतीक हैं। उनके जीवन मूल्यों को समाज तक पहुंचाना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

समारोह में साहित्य, संस्कृति, कला एवं विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और विशिष्ट योगदान से समाज में अलग पहचान बनाने वाले प्रभावशाली नागरिकों को सम्मानित किया गया। सांसद चिंतामणि महाराज ने सम्मानित प्रतिभाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में साहित्यकारों, कलाकारों, विद्वानों तथा संस्कृति के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए। रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, मर्यादा, कर्तव्य, प्रेम, त्याग और सदाचार का मार्ग दिखाने वाला जीवन-दर्शन है।

भगवान श्रीराम एवं माता सीता की पावन प्रेरणा से भारतीय संस्कृति, साहित्य, कला एवं सनातन परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में किया जा रहा यह प्रयास निश्चित रूप से प्रेरणादायी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ती है और युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कारों एवं मूल्यों से जोड़ने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम में संतों, विद्वानों, साहित्यकारों, कलाकारों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। समारोह आध्यात्मिक वातावरण, साहित्यिक गरिमा और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण बना।

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