नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कालरी.......नगर पालिका शिवपुर-चरचा के आगामी निकाय चुनाव में अब महज करीब तीन माह का समय शेष रह गया है। चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होते ही संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता भी तेज होती दिखाई देने लगी है। जन्मदिन समारोहों से लेकर धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में उपस्थिति दर्ज कराने और आम नागरिकों से मेल-मुलाकात का सिलसिला बढ़ गया है। हालांकि नगर पालिका अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने की घोषणा लगभग आठ माह पूर्व हो चुकी है, इसके बावजूद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने अभी तक अपने अधिकृत प्रत्याशी के नाम की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में दावेदारों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है और कई चेहरे पार्टी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। भाजपा जिला अध्यक्ष कोरिया नगर पालिका शिवपुर चर्चा के लिए भरोसेमंद नए चेहरे की तलाश कर रहे हैं।
नगर पालिका शिवपुर चरचा निकाय की सत्ता में आज तक के कार्यकाल में ज्यादा समय तक भाजपा समर्थित अध्यक्ष काबिज रहे, वर्तमान में भी भाजपा के ही अध्यक्ष है ऐसी स्थिति में आगामी चुनाव में भाजपा को अपना दबदबा बरकरार रखने के लिए मसक्कत करनी पड़ेगी , वही कांग्रेस सत्ता में आने के लिए अपना पूरा दमखम लगा देगी कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है वह कुछ पाने के लिए ही कवायत करेगी, बहरहाल अब स्थानीय स्तर पर भाजपा में अध्यक्ष पद को लेकर फिलहाल जिन नामों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में दिखाई दे रही है, उनमें दीपा विश्वकर्मा, दीपा राजेश सिंह, वरिष्ठ पार्षद श्रीमती रामकली पाल और श्रीमती डेजी सिंह प्रमुख रूप से शामिल हैं। वहीं पूर्व पालिका अध्यक्ष रह चुकी कुंती चक्रधारी भी जमीन तलाशने में लगी है प्रत्येक दावेदार की अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि, सामाजिक पकड़ और समर्थकों का आधार है। ऐसे में पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताती है, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी।
दीपा विश्वकर्मा : संगठन में सक्रियता का मिल सकता है लाभ.....
दीपा विश्वकर्मा वर्तमान में भाजपा मंडल शिवपुर-चरचा की अध्यक्ष हैं। वह लंबे समय से पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय रही हैं व संगठन में विभिन्न पदों का दायित्व निर्वहन कर चुके हैं और संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए ही उन्हें मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके मंडल अध्यक्ष बनने के समय पार्टी के भीतर कुछ लोगों की ओर से असहमति के स्वर भी सामने आए थे, लेकिन समय के साथ स्थिति सामान्य होती गई।वर्तमान में दीपा विश्वकर्मा लगातार भाजपा के कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आती हैं। संगठनात्मक जिम्मेदारी और पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी निरंतर मौजूदगी को उनके पक्ष में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि वह अध्यक्ष पद की दौड़ में प्रमुख दावेदारों में गिनी जा रही हैं। यदि पार्टी संगठनात्मक सक्रियता और मंडल स्तर पर नेतृत्व को प्राथमिकता देती है तो उनकी दावेदारी को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
दीपा राजेश सिंह : ... ..उपाध्यक्ष पति की राजनीतिक पकड़ का सहारा.....
दीपा राजेश सिंह मुख्य रूप से गृहिणी हैं और नगर पालिका शिवपुर-चरचा के वर्तमान उपाध्यक्ष राजेश सिंह की पत्नी हैं। राजेश सिंह पूर्व में नगर पालिका अध्यक्ष के साथ-साथ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं और वर्तमान में पुनः उपाध्यक्ष हैं। क्षेत्र में उनकी राजनीतिक एवं सामाजिक पकड़ मानी जाती है तथा आम नागरिकों के साथ संतुलन बनाकर चलने की उनकी क्षमता को उनकी प्रमुख ताकत माना जाता है।
इसी राजनीतिक अनुभव और जनसंपर्क का लाभ उनकी पत्नी दीपा सिंह को मिल सकता है। हालांकि दीपा सिंह स्वयं भी पिछले कुछ समय से पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय दिखाई देने लगी हैं। कुछ दिन पूर्व उनके जन्मदिन का भव्य आयोजन पहली बार चरचा के हनुमान मंदिर परिसर में भंडारे के रूप में किया गया, जिसमें पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए। राजनीतिक जानकार इस आयोजन को भी जनसंपर्क मजबूत करने की कवायद के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में दीपा राजेश सिंह की दावेदारी को भी पार्टी के भीतर गंभीरता से देखा जा रहा है।
रामकली पाल :..... निर्विवाद व्यक्तित्व,लंबा राजनीतिक अनुभव और जमीनी जनाधार.....
नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 5 की पार्षद श्रीमती रामकली पाल को क्षेत्र की सबसे वरिष्ठ पार्षदों में माना जाता है। उनका राजनीतिक अनुभव उस समय से जुड़ा है, जब शिवपुर-चरचा नगर पालिका का स्वरूप अस्तित्व में नहीं था और यह क्षेत्र ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता था। उस समय भी वह पंच रह चुकी हैं। इसके बाद नगर पंचायत के कार्यकाल में पार्षद बनीं और वर्तमान में भी पार्षद के रूप में सक्रिय हैं। इस लिहाज से उन्हें नगरीय निकाय के कामकाज का लंबा अनुभव प्राप्त है।रामकली पाल पिछले चुनाव में पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरी थीं और उन्होंने जीत हासिल की थी। इसे उनके व्यक्तिगत जनसंपर्क और जमीनी जनाधार का प्रमाण माना जाता है। नगर पालिका अध्यक्ष लालमुनी यादव के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान उन्होंने भाजपा के अरुण जायसवाल का समर्थन किया था, जिसके बाद अरुण जायसवाल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।सरल एवं सहज व्यवहार, लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र के लोगों से वर्षों पुराने संबंध उनके पक्ष में माने जा रहे हैं। उनके पति भी चरचा खदान में कर्मचारी रह चुके हैं, जिसका लाभ खदान क्षेत्र के मतदाताओं के बीच उन्हें मिल सकता है। इसके अलावा अब तक उन पर भ्रष्टाचार के आरोपों का कोई प्रमुख सार्वजनिक विवाद सामने नहीं आया है, जिसे उनकी दावेदारी की एक और सकारात्मक बात माना जा रहा है। यही कारण है कि भाजपा के संभावित चेहरों में रामकली पाल को एक मजबूत और अनुभवी दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
श्रीमती डेजी सिंह ... : श्रमिक राजनीति और संगठनात्मक जनाधार पर नजर.......15 वार्डों वाली नगर पालिका शिवपुर-चरचा के 14 वार्ड चरचा खदान क्षेत्र में आते हैं, जहां खदान कर्मचारियों और उनके परिवारों की बड़ी आबादी निवास करती है। ऐसे में श्रमिक संगठनों की भूमिका चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण हो जाती है। चरचा खदान क्षेत्र में भारतीय मजदूर संघ की मजबूत मौजूदगी मानी जाती है।
इसी समीकरण के बीच क्षेत्र के कोयला खदानों में कार्यरत श्रमिक संगठन बीएमएस ट्रेड यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह की पत्नी श्रीमती डेजी सिंह का नाम भी अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में चर्चा में है। धर्मेंद्र सिंह पिछले कई दशकों से श्रमिक संगठन के शीर्ष पदों पर रहते हुए श्रमिकों की समस्याओं और अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहे हैं। इसके चलते खदान क्षेत्र के कर्मचारियों के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। इसके अतिरिक्त भाजपा संगठन में मंडल उपाध्यक्ष व मंडल महामंत्री के पद पर भी बखूबी कार्य कर चुके हैं व वर्तमान में मंडल उपाध्यक्ष के पद पर संगठन की मजबूती के लिए कार्य कर रहे हैं पिछले कुछ समय से डेजी सिंह का नाम अध्यक्ष पद के संभावित प्रत्याशी के रूप में चर्चा में आया है। सुुभाष नगर कॉलोनी में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में उनकी सक्रिय सहभागिता भी देखने को मिली। इसके अलावा चरचा खदान क्षेत्र के मुख्य मार्गों सहित अन्य स्थानों पर उनके शुभकामना संदेशों के फ्लेक्स भी नजर आने लगे हैं। धर्मेंद्र सिंह स्वयं अध्यक्ष पद के लिए अपनी पत्नी की दावेदारी को लेकर इच्छा और सहमति जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में श्रमिक राजनीति, खदान कर्मचारी परिवारों के बीच संपर्क और भाजपा के संभावित मजबूत जनाधार का समीकरण डेज़ी सिंह की दावेदारी को महत्वपूर्ण बना सकता है।
किसके सिर सजेगा अध्यक्ष पद का ताज........फिलहाल चारों संभावित चेहरों की अपनी-अपनी ताकत है। दीपा विश्वकर्मा के पास संगठनात्मक जिम्मेदारी और पार्टी में सक्रियता है, तो दीपा राजेश सिंह के पक्ष में पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान उपाध्यक्ष राजेश सिंह का राजनीतिक अनुभव और जनसंपर्क माना जा रहा है। रामकली पाल के पास वर्षों का राजनीतिक अनुभव और व्यक्तिगत जनाधार है, वहीं डेजी सिंह की दावेदारी के पीछे श्रमिक संगठन और खदान क्षेत्र का समीकरण दिखाई देता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा नेतृत्व आखिर किस चेहरे पर अपना दांव लगाता है। पार्टी की ओर से अधिकृत घोषणा होने तक दावेदारों की सक्रियता और जनसंपर्क अभियान बढ़ने की संभावना है। दूसरी ओर कांग्रेस भी अपने प्रत्याशी के नाम को लेकर चुप्पी साधे हुए है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों के प्रत्याशियों की घोषणा के साथ शिवपुर-चरचा की चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।
फिलहाल संभावित दावेदारों के बीच दावेदारी, जनसंपर्क और शक्ति प्रदर्शन का दौर शुरू हो चुका है लेकिन अंतिम फैसला पार्टी के बंद कमरों में होने वाली बैठकों और नेतृत्व के निर्णय पर निर्भर करेगा। चुनावी मैदान में कौन उतरेगा और किसके पक्ष में मतदाताओं का रुझान बनेगा, इसका जवाब आने वाले तीन महीनों में धीरे-धीरे सामने आएगा।





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