कोरिया जिले में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर उठे सवाल, वाहन चालकों ने घटते माइलेज और इंजन की खराबी की जताई शिकायत


कोरिया बैकुंठपुर / कोरिया जिले में इन दिनों एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर वाहन चालकों के बीच असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। जिले के कई बाइक और कार चालकों का दावा है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने के बाद उनके वाहनों का माइलेज पहले की तुलना में काफी कम हो गया है। साथ ही इंजन की परफॉर्मेंस पर भी असर पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार पोस्ट और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिससे यह विषय चर्चा का केंद्र बन गया है।

हाल ही में एक स्थानीय सोशल मीडिया पोस्ट में एक वाहन चालक ने दावा किया कि उसकी बाइक पहले एक लीटर पेट्रोल में लगभग 50 किलोमीटर का माइलेज देती थी, लेकिन अब वही माइलेज घटकर करीब 30 किलोमीटर रह गया है। उसने यह भी बताया कि इंजन से असामान्य आवाजें आने लगी हैं। पोस्ट के वायरल होने के बाद कई अन्य लोगों ने भी कम माइलेज, इंजन के कंपन, पिकअप में कमी और अधिक ईंधन खपत जैसी शिकायतें साझा की हैं।

वाहन चालकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच यदि पेट्रोल की गुणवत्ता में कमी आती है या माइलेज घटता है तो इसका सीधा असर उनकी जेब पर पड़ता है। रोजाना आवागमन करने वाले लोग पहले की तुलना में अधिक राशि ईंधन पर खर्च करने को मजबूर हैं। कुछ लोगों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रही तो इंजन की मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उद्देश्य कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों को लाभ पहुंचाना है। यदि वाहन निर्माता द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप ईंधन का उपयोग किया जाए तो सामान्य परिस्थितियों में इससे बड़ी तकनीकी समस्या नहीं होनी चाहिए। लेकिन यदि किसी वाहन का इंजन पुराना है, नियमित सर्विस नहीं हुई है या अन्य यांत्रिक कारण हैं, तो माइलेज और प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

जिले के वाहन चालकों की मांग है कि संबंधित विभाग और तेल कंपनियां पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध ईंधन की गुणवत्ता की नियमित जांच कराएं। यदि कहीं मानकों के विपरीत मिलावट या गुणवत्ता संबंधी अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उपभोक्ताओं को भी स्पष्ट जानकारी दी जाए कि उनके क्षेत्र में उपलब्ध पेट्रोल में एथेनॉल की कितनी मात्रा मिश्रित है और उसका वाहनों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

फिलहाल कोरिया जिले में पेट्रोल में वास्तविक मिलावट या मानक से अधिक एथेनॉल मिश्रण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर सामने आ रही शिकायतों और वाहन चालकों के अनुभवों के आधार पर लोगों में चिंता जरूर बढ़ी है। ऐसे में उपभोक्ताओं का मानना है कि जिला प्रशासन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग तथा तेल विपणन कंपनियों को इस मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि आम लोगों का भरोसा बना रहे और यदि कहीं कोई अनियमितता हो तो समय रहते उसका निराकरण किया जा सके।

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