यक्षिणी: मैकल की अनुगूँज’ उपन्यास का भव्य मुखपृष्ठ विमोचन, साहित्यिक संवाद से गूँजी संध्या


कोरिया बैकुंठपुर। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के लिए गौरव का पल जो इतिहास के पन्नों में दर्शन हो गया  गत २३ अप्रैल २०२६ की संध्या एक यादगार साहित्यिक अवसर के रूप में दर्ज हुई, जब बहुप्रतीक्षित उपन्यास “यक्षिणी: मैकल की अनुगूँज” का भव्य मुखपृष्ठ विमोचन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में माननीय कलेक्टर महोदया की विशिष्ट उपस्थिति रही, वहीं आमंत्रित साहित्यकारों, पत्रकारों, लेखक के परिवारजनों, मित्रों तथा साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर आयोजन को विशेष बना दिया।

कार्यक्रम का आरंभ औपचारिक विमोचन से हुआ, जिसके पश्चात उपन्यास की विषयवस्तु, कथानक, पात्रों की संरचना तथा उसके सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों पर विस्तृत परिचर्चा आयोजित की गई। इस दौरान लेखक ने अपनी कृति के सृजन की प्रेरणा, लेखन प्रक्रिया तथा कथा के मूल भाव को साझा किया। परिचर्चा सत्र के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों एवं पाठकों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे, जिनका लेखक ने विस्तार से उत्तर देते हुए उपन्यास की गहराई को स्पष्ट किया।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण ‘ओपन हाउस’ रहा, जिसमें सभी आगंतुकों को अपने विचार रखने और जिज्ञासाएं प्रकट करने का अवसर मिला। इस मुक्त संवाद ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया और साहित्यिक आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच तैयार किया। उपस्थित अतिथियों ने उपन्यास की अवधारणा और शीर्षक की सराहना करते हुए इसे एक नई और प्रभावशाली साहित्यिक पहल बताया।

लेखक ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कार्यक्रम में उपस्थित सभी सम्माननीय अतिथियों, साहित्यकार साथियों, पत्रकारों, मित्रों एवं परिजनों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से उन सभी लोगों का भी धन्यवाद किया, जो किसी कारणवश कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके, किंतु जिनका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहयोग इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण रहा।

अंत में लेखक ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि यह मुखपृष्ठ विमोचन किसी समापन का संकेत नहीं, बल्कि एक नई साहित्यिक यात्रा की शुरुआत है। इस आयोजन ने न केवल एक पुस्तक के विमोचन को चिह्नित किया, बल्कि साहित्य के प्रति समर्पण, संवाद और सृजनशीलता के नए आयाम भी स्थापित किए।

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