चरचा माइंस में बेलगाम अफसर शाही .......नियम विरुद्ध करा रहे कार्य ........बड़े हादसे का इंतजार, .......खदान को घर की जागीर समझ कर देते हैं संडे और पी .एच.डी ड्यूटी...... अंबेडकर जयंती पर नियमों की अनदेखी.......


नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

कोरिया चरचा कॉलरी......... एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र अंतर्गत चरचा माइंस में इन दिनों कुछ अधिकारियों की मनमानी और तानाशाही अपने चरम पर पहुंच गई है। हालात ऐसे हैं कि खदान को मानो कुछ अफसर अपनी “जागीर” समझ बैठे हैं। उच्च अधिकारियों के निर्देशों का भी कोई भय नहीं दिख रहा, जिससे स्पष्ट है कि शिकायतों के बावजूद कड़ी कार्रवाई का अभाव ही इस अव्यवस्था की सबसे बड़ी वजह बन चुका है।खदान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां हर कदम पर सुरक्षा सर्वोपरि होती है, वहीं चरचा खदान के कुछ अधिकारी खुलेआम नियमों को ताक पर रख रहे हैं। इनके द्वारा श्रमिकों से उनके पद के विपरीत कार्य कराया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि यदि किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

    प्रबंधन द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किया गया था कि सप्ताह में न्यूनतम चार दिन ड्यूटी जिसमें शनिवार के दिन की ड्यूटी अनिवार्य है और वर्ष में 190 दिन कार्य करने वाले कर्मचारियों को ही रविवार एवं पी एच डी  ड्यूटी का लाभ मिलेगा। ।लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। शिफ्ट इंचार्ज विजय नवल पटेल द्वारा मनमाने तरीके से ड्यूटी बांटी जा रही है। खान प्रबंधक @कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों को कार्यालय से हटकर खदान के बंकर, पंप और अन्य तकनीकी कार्यों में लगा दिया जाता है। सी .डी. एस  में कार्यरत व्यक्ति को पंप ड्यूटी देना — यह स्पष्ट रूप से पद के विरुद्ध कार्य कराना है।

PHD ड्यूटी में भी भारी गड़बड़ी सामने आई है।मैनेजर ऑफिस के क्लर्क को मैगजीन ड्यूटी दे दी गई।जिन कर्मचारियों को रविवार ड्यूटी नहीं दी जानी चाहिए थी, उन्हें भी सूची में शामिल किया गया।इससे अन्य कर्मचारियों में भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है।

मनमानी और गंभीर लापरवाही के क्रम में अधिकारियों के द्वारा छुट्टी पर गए कर्मचारी भी रविवार ड्यूटी लिस्ट में शामिल कर दिए जाते हैं

गंभीर लापरवाही का आलम यह है कि “गुलाब” नामक कर्मचारी, जो अवकाश पर था, उसका नाम भी रविवार ड्यूटी सूची में जोड़ दिया गया। यह दर्शाता है कि पूरी प्रक्रिया में किस तरह की अनियमितता और लापरवाही व्याप्त है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारी खदान के श्रमिकों से अपने घरेलू कार्य भी करा रहे हैं।जबकि नियम स्पष्ट हैं कि श्रमिकों से केवल खदान से संबंधित कार्य ही लिया जाना चाहिए। इससे एसईसीएल को आर्थिक नुकसान हो रहा है और अधिकारियों की “अफसरशाही” और स्वार्थ उजागर हो रहा है

 फर्जी हाजिरी और सेटिंग का खेल......

विश्वास सूत्रों के अनुसार रविवार और पी .एच.डी ड्यूटी के नाम पर ऐसे कर्मचारियों के नाम डाले जाते हैं, जो वास्तव में ड्यूटी पर आते ही नहीं। पहले से “सेटिंग” होती है फिर खास लोगों को फोन कर बुलाया जाता है यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित हेराफेरी की ओर इशारा करती है।

-14 अप्रैल अंबेडकर जयंती पर भी हेरा फेरी........अंबेडकर जयंती के दिन पी  एच डी का लाभ दिया जाता है इस दिन भी कई अनियमितताएं सामने आईं— अधिकारियों के द्वारा मैनेजर ऑफिस के एक चपरासी को सुरक्षा गार्ड की ड्यूटी दे दी गई, जबकि ऑफिस बंद था और उसकी ड्यूटी नहीं लगनी चाहिए थी,इसी क्रम में एक बिजली फिटर को भी गार्ड की ड्यूटी में लगा दिया गया, मनमानी के क्रम में मैनेजर ऑफिस के एक क्लर्क को मैगजीन बाबू की ड्यूटी दे दी गई जबकि इसके पूर्व कभी उसे वहां पर ड्यूटी नहीं दिया गया था इससेस्पष्ट है कि यह सब “तीन हाजिरी” का लाभ देने और नियमों की धज्जियां उड़ाने के लिए किया गया। मैनेजर ऑफिस के बाबू को विशेष रूप से एक दिन में तीन हाजिरी का लाभ दिलाते हुए एचडी ड्यूटी दी गई जबकि चरचा कालरी के अन्य कार्यालय में कार्यरत को यह ड्यूटी सुविधा नहीं दी इस वजह से लोगों में और भी ज्यादा नाराजगी है। 


इन तमाम अनियमितताओं, तानाशाही और सुरक्षा से खिलवाड़ के खिलाफ अब श्रमिकों में भारी आक्रोश है।

श्रमिकों का कहना है कि—नियमों का खुलेआम उल्लंघन बंद होदोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होऔर खदान में पारदर्शिता व सुरक्षा सुनिश्चित की जाए चरचा माइंस में चल रही यह मनमानी न केवल श्रमिकों के अधिकारों का हनन है, बल्कि खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। यदि समय रहते उच्च प्रबंधन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो स्थिति और भी विस्फोटक हो सकती है।

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