जनकपुर, जिला मनेन्द्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर:
बच्चों में तेजी से बढ़ रहे मधुमेह, विशेषकर टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार एवं समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में 18 मार्च को एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्वास्थ्यकर्मियों को बाल मधुमेह के प्रति संवेदनशील एवं प्रशिक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
कार्यशाला में विकासखंड स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, महिला एवं पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता, पर्यवेक्षक, मितानिन प्रशिक्षक तथा ब्लॉक समन्वयक (मितानिन) सहित कुल 90 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को टाइप-1 डायबिटीज के प्रभाव, इसके प्रारंभिक लक्षणों की पहचान, समय पर उपचार एवं समग्र प्रबंधन की तकनीकी जानकारी प्रदान करना था, ताकि वे समुदाय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित कर सकें।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इनमें टाइप-1 डायबिटीज की पहचान, उपचार एवं प्रबंधन की प्रक्रियाएं, रोगियों के लिए परामर्श (काउंसलिंग) की आवश्यकता, रोगी सहायता समूहों की भूमिका, समुदाय आधारित जागरूकता रणनीतियां तथा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक सहयोग का महत्व प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन विषयों के माध्यम से प्रतिभागियों को न केवल सैद्धांतिक बल्कि व्यावहारिक ज्ञान भी प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने समूह गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई और अपने अनुभव साझा किए। इससे विषय की गहन समझ विकसित हुई और भविष्य में रोगियों की बेहतर देखभाल के लिए उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई। कार्यशाला का माहौल सहभागिता और सीखने की भावना से परिपूर्ण रहा, जिससे प्रशिक्षण अधिक प्रभावी बन सका।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने इसे एक प्रेरणादायक कदम बताते हुए कहा कि इससे स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता में वृद्धि होगी और बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा।
प्रशिक्षण का संचालन यूनिसेफ की टीम द्वारा स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में किया गया। स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ के समन्वित प्रयासों से आयोजित इस कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई, जो इसकी सफलता को दर्शाती है।
इस अवसर पर खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव रमन, जिला नोडल आरसीएच डॉ. अभया गुप्ता, जिला नोडल अधिकारी (गैर-संचारी रोग) सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही। साथ ही जिला नोडल एनसीडी डॉ. नम्रता एवं श्री अवनीश पाण्डेय का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम की निरंतरता बनाए रखते हुए आगामी 19 मार्च को मनेन्द्रगढ़ में भी इसी प्रकार की उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। जिला स्वास्थ्य विभाग ने विश्वास व्यक्त किया है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से बाल मधुमेह की समय पर पहचान एवं प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित कर बच्चों के स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की जा सकेगी।

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