कोरिया बैकुंठपुर। जीवन की यात्रा चाहे आध्यात्मिक हो या सांसारिक, सफलता का मूल आधार विश्वास ही है। जब व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर ईश्वर की कृपा-शक्ति पर पूर्ण भरोसा रखता है, तब उसके लिए हर मार्ग सुगम और कल्याणकारी बन जाता है। संतों और शास्त्रों में भी यही संदेश दिया गया है कि संदेह व्यक्ति की प्रगति को रोकता है, जबकि अटूट विश्वास उसे मंजिल तक पहुंचाता है।
अक्सर देखा जाता है कि व्यक्ति अपने निर्णयों पर बार-बार प्रश्न खड़े करता है—“क्या मैं सही कर रहा हूँ?” या “क्या मुझे सफलता मिलेगी?” ऐसी शंकाएं मन में अस्थिरता उत्पन्न करती हैं और ऊर्जा को क्षीण कर देती हैं। परिणामस्वरूप व्यक्ति लक्ष्य से भटकने लगता है। इसके विपरीत यदि मन में यह दृढ़ निश्चय हो कि वह ईश्वर की कृपा से सही मार्ग पर है और निरंतर आगे बढ़ रहा है, तो यही विश्वास उसे स्थिरता, साहस और निरंतरता प्रदान करता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से भगवान पर भरोसा केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सकारात्मक शक्ति है। यह विश्वास कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति को संभाले रखता है और निराशा को आशा में बदल देता है। जब मन संदेह से मुक्त होता है, तब व्यक्ति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है।
अतः आवश्यक है कि हम अपने प्रयासों और प्रभु की कृपा पर विश्वास रखें। संदेह को त्यागकर यदि विश्वास को जीवन का आधार बनाया जाए, तो सफलता स्वयं हमारे कदम चूमती है। यही राधेकृष्ण का संदेश है—विश्वास ही जीवन की सच्ची शक्ति और सफलता का मार्ग है।

0 टिप्पणियाँ