नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कालरी...... एस ई सी एल बैकुंठपुर क्षेत्र अंतर्गत चर्चा माइंस में विभागीय सिविल कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां हालात ऐसे बन चुके हैं कि कहीं का ईंट, कहीं का रोड़ा—भानमती ने कुनबा जोड़ा वाली कहावत पूरी तरह चरितार्थ होती नजर आ रही है। ठेकेदार मनमानी पर उतारू हैं और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाणताजा चरचा कोलरी के मुख्य मार्ग स्थित रीज़नल स्टोर की बाउंड्री वॉल का है, जहां ऊंचाई बढ़ाने के नाम पर कई जगह बेकार, टूटे-फूटे और पहले से निष्प्रयोज्य ईंटों के टुकड़ों से जुड़ाई कर दी गई। दिखावे के लिए सामने की परत में कुछ नई और सही ईंटें लगा दी गईं, जबकि अंदर पूरा निर्माण घटिया सामग्री से किया गया—जो न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि कंपनी की संपत्ति के साथ खुला खिलवाड़ भी।
पेटी ठेकेदारी का खेल, नियमों की खुलेआम धज्जियां.......सूत्रों के अनुसार, यह कार्य बैकुंठपुर क्षेत्र से बाहर रहने वाले ठेकेदार अशोक अग्रवाल द्वारा लिया गया, लेकिन वास्तविक निर्माण स्थानीय स्तर पर पिंटू सिंह नामक व्यक्ति से कराया जा रहा है। अर्थात एस ई सी अल का कार्य सीधे ठेकेदार द्वारा न कराकर पेटी ठेकेदार को सौंप दिया गया—जो अपने आप में गंभीर अनियमितता और नियम विरुद्ध प्रक्रिया है पेटी ठेकेदार के द्वारा निर्माण में सीमेंट का अत्यंत कम उपयोग किया जा रहा है। जुड़ाई के बाद नियमानुसार दीवार की तराई (पानी से सिंचाई) अनिवार्य होती है, लेकिन यहां एक बार भी पानी का छिड़काव नहीं किया गया। जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती है आम नागरिक जब अपना घर बनाता है तो 8–10 दिनों तक नियमित पानी देता है ताकि मजबूती बनी रहे, लेकिन यहां ठेकेदार सिर्फ जुड़ाई कर, ऊपर से प्लास्टर कर लिपापोती में जुटा है—ताकि जल्द से जल्द भुगतान निकाल लिया जाए।हैरानी की बात यह है कि न तो किसी अधिकारी ने मौके पर निरीक्षण किया, न यह देखा कि तराई हो रही है या नहीं। यह चुप्पी केवल लापरवाही नहीं, बल्कि मूक सहमति का संकेत देती है।
विश्वास सूत्रों के अनुसार चर्चा वेस्ट के समीप स्थित सुरंग बंकर के पास वी अन्य स्थानों पर भी इसी प्रकार के घटिया निर्माण कार्य कराए गए हैं। इतना ही नहीं, बिना कार्य कराए लाखों रुपये का अवैध भुगतान किए जाने की भी चर्चा जोरों पर है, जिसका जल्द ही खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।रात-दिन खून-पसीना बहाकर देश के लिए कोयला निकालने वाले मजदूरों की मेहनत की कमाई को इस तरह घटिया निर्माण और भ्रष्ट व्यवस्था की भेंट चढ़ाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि राष्ट्रहित के भी खिलाफ है।
संवेदनशील महाप्रबंधक से कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा.......अब क्षेत्र के संवेदनशील महाप्रबंधक श्री बी.एन. झा से अपेक्षा की जा रही है कि वे कंपनी हित में निष्पक्ष, उच्चस्तरीय जांच कराएं और दोषी ठेकेदारों व लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में एस.ई सी एल की साख और संपत्ति के साथ इस तरह का खिलवाड़ न हो।
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