वृहद हिन्दू सम्मेलन: एकजुटता, संस्कृति और जागरण का संदेश लेकर उमड़ा बरदिया ग्राम पंचायत परिसर


कोरिया बैकुंठपुर /जिले के ग्राम पंचायत बरदिया में गुरुवार 25 दिसंबर 2025 को आयोजित “विशाल हिन्दू सम्मेलन” में क्षेत्रभर से लोगों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति देखी गई। हिन्दू समाज की एकता, सांस्कृतिक चेतना, धार्मिक जागरण और सनातन मूल्यों के संरक्षण का संकल्प लिए यह सम्मेलन सुबह प्रातः 10 बजे शुभारंभ हुआ। दुर्गा पूजा पंडाल स्थित ग्राम पंचायत प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक आस्था का वातावरण बनाया, बल्कि समाज को एकजुट होकर आगे बढ़ने का संदेश भी दिया।

आयोजक हिन्दू सम्मेलन आयोजन समिति, बरदिया मण्डल जिला कोरिया (छ.ग.) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य था—विभिन्न मत, पंथ और जातीय विविधताओं के बीच हिन्दू समाज को एक धागे में पिरोना, समाजिक समरसता को मजबूत करना तथा सनातन परंपराओं में जागृति लाना। कार्यक्रम के प्रारंभ में वेद मंत्रोच्चार के बीच सामूहिक सुंदरकाण्ड पाठ किया गया, जिसके पश्चात सम्मेलन दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक विभिन्न चरणों में संपन्न हुआ।

सम्मेलन में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि “हिन्दू: सोदरा: सर्वे, न हिन्दू पतितो भवेत्”— अर्थात सभी हिन्दू भाई-बहन हैं और कोई भी हिन्दू पतित नहीं हो सकता। मंच से यह संदेश भी दिया गया कि हिन्दुओं की रक्षा और समाज की समरसता ही सनातन धर्म की सच्ची दीक्षा है। आयोजकों ने स्पष्ट कहा—“समरसता ही मेरा मंत्र है”, जो सभा की मुख्य भावना के रूप में गूंजता रहा।

कार्यक्रम के दौरान प्रदेश और क्षेत्र के वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सनातन भारत माता की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए समाज का संगठित होना अत्यंत आवश्यक है। आज के समय में समाजिक विघटन, मूल्यहीनता, मतभेद और दूरियों को समाप्त कर सबके लिए समान मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करना ही समय की मांग है। वक्ताओं ने कहा कि जब समाज एकजुट होता है तो उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है—उसी शक्ति के जागरण हेतु ऐसे सम्मेलनों की आवश्यकता है।

सम्मेलन में संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं के संरक्षण पर विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी परंपराओं, ग्रंथों, गुरुओं और राष्ट्रीय मूल्यों को समझें तथा समाज सेवा, शिक्षा और सांस्कृतिक उन्नयन के कार्यों में आगे आएं। सम्मेलन में यह भी उल्लेख किया गया कि समाज में फैली कुरीतियों को दूर कर, एक-दूसरे के मतभेद भुलाकर, आपसी सहयोग और सद्भाव की भावना से आगे बढ़ने पर ही समाजिक चुनौतियों से निपटना संभव होगा।

सम्मेलन के अंत में सामूहिक भोजन/प्रसाद ग्रहण का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों सहित बड़ी संख्या में आमंत्रितजन शामिल हुए। आयोजकों ने उपस्थित सभी सनातनी बंधुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन मात्र एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समरस हिन्दू समाज के निर्माण की एक पहल है, जिसे निरंतर जारी रखा जाएगा।

ग्राम के वरिष्ठजनों ने इसे सामाजिक समरसता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने संकल्प लिया कि वे समाज में संगठन, सेवा, सद्भाव और संस्कृति की अलख जगाने का प्रयास जारी रखेंगे—क्योंकि “हिन्दुत्व केवल आस्था नहीं, जीवन का मार्ग है।”

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