नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कालरी......नगर पालिका शिवपुर चरचा का निकाय चुनाव मुख्य रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच लड़ा जाएगा यह चुनाव भाजपा के लिए अघोषित रूप से चुनौती है वही कांग्रेस को सत्ता शासन के खिलाफ जबरदस्त अंदरुनी कलह के बावजूद अपना वर्चस्व बनाए रखने की कवायत करनी होगी पिछली बार वर्ष 2021 में जब निकाय चुनाव हुआ था तो नगर पालिका शिवपुर चरचा के 15 वार्डों में से भाजपा के मात्र 5 पार्षद विजई हुई हुए और कांग्रेस के 8 पार्षद व दो निर्दलीय पार्षद विजय हुए थे नगर पालिका शिवपुर चर्चा में 2016 के चुनाव में भी कांग्रेस समर्थित अजित लकड़ा अध्यक्ष बने इसके पश्चात वर्ष 2021 में लगातार दूसरी बार कांग्रेस समर्थित श्रीमती लाल मुनि यादव अध्यक्ष बनी अब मात्र 2 महीने की अवधि में निकाय चुनाव होना है देखना यह होगा कि इस बार इन दोनों में से कौन बाजी मार ले जाता है नगर पालिका शिवपुर चरचा के वार्ड क्रमांक 4 वार्ड क्रमांक 6 वार्ड क्रमांक 9 वार्ड क्रमांक 11 वार्ड क्रमांक 14 ऐसे वार्ड है जहां आज तक भाजपा नहीं जीत सकी अर्थात ये वार्ड कांग्रेस के लिए अजेय गढ़ साबित हो रहे हैं इन वार्डो में भाजपा के हारने का मुख्य कारण योग्य प्रत्याशी चयन का अभाव है चुनाव खत्म होते ही शीर्ष पदाधिकारी भूल जाते हैं, वे कभी यह मंथन नहीं करते की लगातार जिस वार्ड में हार रहे हैं उसमें कैसे सफलता पाई जाए ,कैसी रणनीति बनाई जाए ,नगर पालिका शिवपुर चरचा के 5 पार्षदों से बढ़कर 15 तक पहुंचाने के लिए जिला अध्यक्ष भाजपा को बहुत ही सोची समझी रणनीति बनानी होगी, जिससे पार्षदों की संख्या बढ़ सके वर्तमान में कतिपय पार्षदों के द्वारा मनमानी की वजह से भी संगठन को काफी नुकसान होता है वर्तमान के पांच पार्षदों में से दो पार्षद ऐसे हैं जो इस वर्ष यदि चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा संगठन को नुकसान ही मिलेगा इनके द्वारा पार्षद निधि के मामले में व्यापक रूप से हेरा फेरी की गई, सत्ता के मद मेंअवैध कार्य किए गए, सिर्फ और सिर्फ अपनी स्वार्थ सिद्धि की गई आज यदि निष्पक्ष रूप से सभी पार्षदों को अपनी पार्षद निधि की जानकारी सार्वजनिक रूप से जारी करने को कहा जाए तो ये दूर-दूर तक कहीं नजर नहीं आएंगे क्योंकि ये अपने गलत कामों की वजह से जनता के सामने मुंह दिखा नहीं सकते यही हाल कांग्रेस पार्टी का भी रहेगा बहर हाल पार्षद निधि के मामले में दोनों ही दलों के पार्षद ,पार्षद निधि के व्यय के मामले में किसी का विरोध नहीं करते क्योंकि वह एक दूसरे की पूरी पोल पट्टी जानते हैं और लालच की वजह से कुछ नहीं कहते क्योंकि यदि एक ने शुरुआत की तो दूसरा उसकी पोल खोल कर रख देगा।
वर्ष 2021 में नगर पालिका शिवपुर चरचा में कांग्रेस समर्थित श्रीमती लाल मुनी यादव अध्यक्ष बनी थी उस समय उनके पक्ष में कांग्रेसी पार्षदों के अतिरिक्त दो निर्दलीय पार्षद कुल 10 पार्षदों ने विश्वास मत दिया था किंतु यही पार्षद अगस्त 2024 में बदल गए और 23 अगस्त 2024 को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान लगभग 12 पार्षदों ने तत्कालीन अध्यक्ष श्रीमती लाल मुनि यादव के विरुद्ध अपना अविश्वास मत दिया और लालमुनि यादव को अध्यक्ष की कुर्सी छोड़नी पड़ी, अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में विश्वस्त सूत्रों के अनुसार तत्कालीन कुछ कांग्रेसी पार्षदों ने लाखों रुपयों की राशि लेकर श्रीमती लाल मुनि यादव के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था इस प्रकार यह तथाकथित जनसेवक चंद पैसों में बिक गए अब जब चुनाव आ रहा है, तब पार्षदों को चुनाव लड़ने की फिक्र हो रही है और वह अपने आप को पाक साफ दूध के धुले बताने में लग गए हैं, लेकिन जनता सब जानती है
नगर पंचायत के गठन से आज तक लगभग 20 वर्षों की अवधि में नगर पालिका शिवपुर चर्चा के वार्ड क्रमांक 1,5,7 और 9 ऐसे वार्ड है जहां आज तक कांग्रेस जीत नहीं सकी, 2021 मे के चुनाव में कांग्रेस के आठ पार्षद जीते थे उनमें से कुछ ने अविश्वास प्रस्ताव के पहले बीजेपी की सदस्यता ले ली, कुछ में दल बदल कर अविश्वास प्रस्ताव में मतदान किया ,अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष को मात्र 3 वोट मिले थे इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि कांग्रेसी पार्षदों की संख्या पालिका में बेहद कम हो गई है, इसके अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर कांग्रेसी खेमे में गुटबाजी भी जोरों पर है पालिका अध्यक्ष पद हेतु कांग्रेस के तीन खेमे अपनी अपनी पत्नियों को लेकर जनसंपर्क में लगे हैं जो क्षेत्र में चर्चा का विषय है ऐसी स्थिति में यदि किसी एक को भी संगठन टिकट देती है तो भी हर तरह से संगठन को नुकसान होगा, पालिका चुनाव में समय भी बेहद कम है अब देखना यह है कि कांग्रेस नेतृत्व कौन सी रणनीति अपनाता हैं।
बिकाऊ पार्षदों पर संगठन कैसे करें भरोसा.......... नगर पालिका शिवपुर चरचा के पार्षद महज दिखावे के लिए जनसेवा में लगे रहते हैं किंतु अप्रत्यक्ष रूप से वे सिर्फ स्वार्थ सिद्धि करते हैं कौन पार्षद कब दल बदल लेगा या पैसे के लिए बिक जाएगा यह कहना संभव नहीं है लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद आपस में तालमेल बनाए रखना भी इन पार्षदों की खूबी है प्रतिवर्ष मिलने वाले 4: 50 लाख रुपए के पार्षद निधि जो 5 वर्षों में 22 लाख 50000 होती है इस निधि के कार्य व व्यय की जानकारी भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के कोई भी पार्षद आज तक सार्वजनिक नहीं किए , इनके द्वारा पार्षद निधि सार्वजनिक न करने की क्या वजह हो सकती है, आप स्वयं समझ सकते हैं बावजूद इसके यह पुनः इस चुनाव में हाथ जोड़कर आपसे वोट मांगने आएंगे, वर्ष 2021 में पालिका के इन्हीं पार्षदों ने उपाध्यक्ष चुनाव के समय क्रॉस वोटिंग किया इसके पश्चात अविश्वास प्रस्ताव के दौरान चंद पैसों के लालच में दल बदल कर बोर्ड दिए इनकी कार्य शैली से यह स्पष्ट होता है कि यह जनप्रतिनिधि विश्वास घात करते हैं और जनता के विश्वास योग्य नहीं है बौजूद इसके अभी भी कई पार्षद स्वयं ना आकर अपनी पत्नियों को चुनाव लड़ने की होड़ में लगे हुए हैं।
दोनों दलों के लिए यह समय आत्म मंथन का है यदि भाजपा पुराने चुनावी समीकरण से बाहर निकल कर नए चेहरे ,स्वच्छ छवि , स्थानीय जन समस्याओं पर आधारित रणनीति अपनाती है तो वह अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है, वहीं कांग्रेस यदि समय रहते अपने आंतरिक मतभेदों को दूर कर सर्वमान्य प्रत्याशी और मजबूत संगठनात्मक तालमेल स्थापित करती तो वह भी मुकाबले में अपनी पकड़ बनाए रख सकती है लोकतंत्र में जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है जो प्रतिनिधि इस विश्वास को बनाए रखेंगे ,वह चुनावी मैदान में टिक पाएंगे ,शिवपुर चरचा की जनता इस बार किसे अवसर देती है ,इसका फैसला चुनाव परिणाम करेंगे ,लेकिन इतना तय है कि चुनाव में टिकट से लेकर पार्षद निधि तक गुटबाजी से लेकर आत्मविश्वास तक हर मुद्दे पर राजनीतिक दलों की परीक्षा होगी।




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