कोरिया बैकुंठपुर। जिले में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और इनमें जा रही लोगों की जान को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में परिवहन विभाग पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहा है और अपने दायित्वों का निर्वहन गंभीरता से नहीं कर रहा है। वाहनों की नियमित जांच, ओवरलोडिंग पर रोक और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? लगातार सामने आ रहे हादसे विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
गुरुवार, 22 अक्टूबर को केल्हारी मार्ग पर एक बस अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई। इससे घटना से पूर्व छिंदिया-पटना मार्ग पर ऑटो दुर्घटना में चार लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रहे इन हादसों के बीच परिवहन विभाग की भूमिका और उसकी सक्रियता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
नियमों की अनदेखी, लेकिन कार्रवाई कहां?
प्रदीप गुप्ता ने आरोप लगाया कि जिले में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर वाहन चलाने, स्कूली बच्चों को क्षमता से अधिक संख्या में ले जाने, बिना वैध परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र के वाहनों के संचालन तथा पिकअप में क्षमता से अधिक सामान लादकर परिवहन करने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। वहीं, बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों और अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन पर नियंत्रण को लेकर भी निगरानी की जरूरत है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सड़कों पर नियमों की अनदेखी हो रही है, वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जा रही हैं और फिटनेस संबंधी नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो परिवहन विभाग आखिर कर क्या रहा है? क्या विभाग किसी बड़े हादसे के इंतजार में है? दुर्घटना होने के बाद चिंता जताने के बजाय विभाग को पहले ही सक्रिय होकर नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
दायित्व निभाने में नाकाम साबित हो रहा विभाग!
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग की निष्क्रियता और प्रभावी निगरानी के अभाव में नियमों का उल्लंघन करने वालों के हौसले बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि विभाग का काम केवल कार्यालय में बैठकर जिम्मेदारियां निभाने का दावा करना नहीं, बल्कि सड़कों पर उतरकर वाहनों की जांच करना और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करना भी है। जब लगातार हादसे हो रहे हों और लोगों की जान जा रही हो, तब विभाग की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
अब जवाबदेही से नहीं बच सकता परिवहन विभाग,
जिले में लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि परिवहन विभाग अपनी जिम्मेदारी कब निभाएगा? ओवरलोडिंग, परमिट, फिटनेस और यात्री सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे? आखिर कब तक नियमों की अनदेखी और कथित लापरवाही के बीच आम लोगों की जान जोखिम में पड़ती रहेगी?
अब परिवहन विभाग को अपनी कार्यप्रणाली स्पष्ट करते हुए बताना चाहिए कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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