बैकुंठपुर में बेसहारा गोवंशों के लिए गौधाम नहीं, सड़कों पर हादसों का खतरा बढ़ा, सड़क पर घूमते मवेशियों को हटाने के लिए तैनात कर्मचारी नदारद, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल


कोरिया बैकुंठपुर। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बेसहारा गोवंशों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। सड़कों, चौक-चौराहों और प्रमुख मार्गों पर घूमते गोवंश न केवल यातायात व्यवस्था में बाधा बन रहे हैं, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों की जान के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं। इसके बावजूद क्षेत्र में बेसहारा गोवंशों को सुरक्षित रखने के लिए अब तक समुचित गौधाम की व्यवस्था नहीं होने से समस्या का स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा है।

नगर पालिका ने लगाई ड्यूटी, लेकिन कर्मचारी ही नदारद!

जानकारी के अनुसार, बैकुंठपुर नगर पालिका द्वारा सड़कों पर घूमने वाले गोवंशों को मार्ग से हटाने और दुर्घटनाओं की आशंका कम करने के लिए चार से पांच कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन आरोप है कि पिछले लगभग दस दिनों से इनमें से आधे से अधिक कर्मचारी अपने कार्यस्थल से नदारद हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब गोवंशों को सड़कों से हटाने की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारी ही नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होंगे, तो व्यवस्था कैसे सुधरेगी?

इस संबंध में गौ रक्षक अनुराग दुबे के द्वारा  नगर पालिका के जिम्मेदार प्रभारी को अवगत कराने के बाद भी अपेक्षित समाधान नहीं हो पाने की बात सामने आ रही है। इससे आम नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का सवाल है कि जब दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है, तब जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से क्यों नहीं ले रहे हैं?

गोवंशों के साथ इंसानों की जान भी खतरे में,

बैकुंठपुर के विभिन्न मार्गों पर बेसहारा गोवंशों का जमावड़ा अक्सर देखने को मिलता है। कई बार मवेशी अचानक सड़क पर आ जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालकों और अन्य वाहनों के चालकों को संभलने का मौका तक नहीं मिल पाता। रात के समय यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि अंधेरे में सड़क पर बैठे या खड़े मवेशी समय रहते दिखाई नहीं देते।

स्थानीय स्तर पर लगातार दुर्घटनाओं और गोवंशों के घायल होने की चिंता जताई जा रही है। सड़क हादसों में जहां बेजुबान पशुओं को चोटें पहुंचती हैं, वहीं वाहन चालक और राहगीर भी गंभीर रूप से घायल होने का जोखिम उठाते हैं। ऐसे में यह केवल पशुओं की देखभाल का मामला नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय भी है।

गौधाम के अभाव में कहां जाएं बेसहारा गोवंश?

बैकुंठपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बेसहारा गोवंशों को रखने के लिए पर्याप्त और व्यवस्थित गौधाम की कमी समस्या को और गंभीर बना रही है। जब तक इन पशुओं के लिए सुरक्षित आश्रय, चारे-पानी और देखभाल की स्थायी व्यवस्था नहीं होगी, तब तक उन्हें सड़कों से हटाने की कार्रवाई का स्थायी परिणाम मिलना मुश्किल है।

अनुराग दुबे ने कहा कि गोवंशों के संरक्षण की बात केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए स्थानीय निकाय, पशुपालन विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बेसहारा पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, उनके स्वास्थ्य की देखभाल करने और नियमित निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करना समय की मांग है।

जिम्मेदार प्रभारी की भूमिका पर उठ रहे सवाल,

जब नगर पालिका द्वारा गोवंशों को सड़क से हटाने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित की गई है, तो उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना भी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। यदि कर्मचारी लंबे समय तक अनुपस्थित रहते हैं, तो उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि गोवंशों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए नगर पालिका के पास क्या कार्ययोजना है और उसका क्रियान्वयन किस स्तर पर हो रहा है।

प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग,

बैकुंठपुर के नागरिकों की सुरक्षा और बेजुबान पशुओं के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नगर पालिका एवं जिला प्रशासन को इस समस्या पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, सड़कों से गोवंशों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, दुर्घटनाप्रवण मार्गों पर निगरानी बढ़ाने तथा स्थायी गौधाम की व्यवस्था के लिए ठोस पहल की जानी चाहिए।

 देखने वाली बात यह होगी कि नगर पालिका प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर कब तक प्रभावी कदम उठाता है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो सड़क पर घूमते बेसहारा गोवंशों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहेगा। सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या फिर समय रहते गोवंशों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए ठोस कार्रवाई करेगा?

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