नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कालरी......धार्मिक आस्था जब सामाजिक सेवा और जनकल्याण से जुड़ती है, तो वह समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन जाती है। ऐसा ही सराहनीय कार्य न्यू महाराणा प्रताप कॉलोनी गणेश पूजा समिति के युवा सदस्यों द्वारा किया गया है। गणेश पूजा के समापन के बाद समिति के सदस्यों ने क्षेत्र के तीन मंदिरों को भोग-भंडारे में उपयोग होने वाले बर्तन सहयोग स्वरूप भेंट किए। युवाओं की इस पहल को धार्मिक भावना, सामाजिक जिम्मेदारी और सामुदायिक सहयोग की अनुकरणीय मिसाल माना जा रहा है।
समिति के सदस्य संस्कार शर्मा, दिलीप कुमार, जग्गा, परीडॉ , बलराम प्रधान व समिति उदासियों के सहयोग से विभिन्न मंदिर समितियों को आवश्यक बर्तन प्रदान किए गए। इसके अंतर्गत श्री हनुमान मंदिर समिति को आठ बाल्टी एवं आठ कलछुल, श्री जगन्नाथ मंदिर, पश्चिम नेपाल गेट समिति को 50 लीटर क्षमता का गंज एवं ढक्कन, तथा श्री शिव मंदिर, सुभाष नगर को चार स्टील के ड्रम, चार बाल्टी एवं चार कलछुल भेंट किए गए।इन बर्तनों का उपयोग मंदिरों में आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों, भोग वितरण एवं भंडारों के दौरान किया जा सकेगा। इससे मंदिर समितियों को सुविधा मिलेगी और सामूहिक धार्मिक आयोजनों में सहयोग भी प्राप्त होगा। श्री हनुमान मंदिर के पुजारी एवं मंदिर समिति के द्वारा युवाओं को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
आज के समय में जब युवाओं की भागीदारी को लेकर अक्सर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं होती हैं, ऐसे में धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाजसेवा की दिशा में उठाया गया यह कदम सकारात्मक संदेश देता है। इन युवाओं ने यह प्रदर्शित किया है कि धार्मिक आस्था केवल पूजा-पाठ और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के अनुरूप सहयोग करना भी धर्म और सेवा की भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।गणेश पूजा के समापन के बाद उपयोगी सामग्री मंदिरों को समर्पित करना इस बात का उदाहरण है कि धार्मिक आयोजन से प्राप्त सामूहिक भावना को समाजहित के कार्यों में भी लगाया जा सकता है। यह पहल अन्य युवा मंडलों और धार्मिक समितियों को भी अपने क्षेत्र के मंदिरों, सामाजिक संस्थाओं तथा जरूरतमंद लोगों के लिए सहयोगात्मक कार्य करने की प्रेरणा दे सकती है।
न्यू महाराणा प्रताप कॉलोनी गणेश पूजा समिति के सदस्यों का यह प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे धार्मिक आयोजनों के साथ सेवा, सहयोग और सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा मिलता है। युवाओं की ऐसी सकारात्मक सहभागिता से धार्मिक परंपराएं मजबूत होती हैं और समाज में आबपसी सहयोग की भावना विकसित होती है।इन युवाओं के नेक कार्य की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। उम्मीद है कि उनकी यह पहल अन्य युवाओं को भी धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए प्रेरित करेगी।



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