श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश के साथ आध्यात्मिक प्रेरणा का प्रसार


कोरिया बैकुंठपुर। नगर में प्रातःकाल एक आध्यात्मिक संदेश के माध्यम से श्रद्धालुओं के बीच भगवान के प्रति आस्था और विश्वास का भाव जागृत किया गया। संदेश में “ॐ नमो नारायणाय” के उच्चारण के साथ भगवान श्रीराम की दिव्य छवि प्रस्तुत की गई, जिसमें उन्हें धनुष-बाण धारण किए आशीर्वाद मुद्रा में दर्शाया गया है। इस चित्र के साथ श्रीमद्भगवद्गीता का प्रसिद्ध श्लोक उद्धृत कर भक्तों को ईश्वर पर अटूट भरोसा रखने की प्रेरणा दी गई।

संदेश में उल्लेख किया गया कि जो व्यक्ति प्रभु पर विश्वास रखता है, वह कभी अकेला नहीं होता। जब संसार साथ छोड़ देता है, तब ईश्वर स्वयं उसका हाथ थाम लेते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता का श्लोक — “अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जना: पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥” — का उल्लेख करते हुए बताया गया कि जो भक्त एकनिष्ठ भाव से भगवान का स्मरण करते हैं, उनके योग (जो नहीं है उसे प्रदान करना) और क्षेम (जो है उसकी रक्षा करना) का भार स्वयं भगवान उठाते हैं।

इस आध्यात्मिक संदेश का उद्देश्य समाज में सकारात्मकता, विश्वास और धैर्य का संचार करना है। वर्तमान समय में बढ़ती भागदौड़ और मानसिक तनाव के बीच ऐसे प्रेरक संदेश लोगों को आंतरिक शांति प्रदान करते हैं। श्रद्धालुओं ने इस संदेश को साझा करते हुए सभी प्रभु प्रेमियों को “सुबह की राम-राम” कहकर दिन की मंगलमय शुरुआत की कामना की।

धार्मिक और आध्यात्मिक विचारों से ओतप्रोत यह संदेश लोगों को यह स्मरण कराता है कि कठिन परिस्थितियों में भी आस्था ही सबसे बड़ा संबल है। समाज में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने की दिशा में ऐसे प्रयास सराहनीय माने जा रहे हैं।

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