श्रमदान से बदली तस्वीर – सूखे परिसर में खिला हरियाली का नया अध्याय..... बैकुंठपुर क्षेत्र के रेस्क्यू कर्मियों की अनूठी पहल बनी मिसाल...... कोल टब में पुष्प वाटिका,,, स्वनिर्मित झरने से शीतलता का एहसास......



नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

कोरिया चरचा कॉलरी,,,,,,,,,जहाँ कभी सूखा और नीरस वातावरण दिखाई देता था, आज वहीं हरियाली, रंग-बिरंगे पुष्पों और कल-कल बहते जल की मधुर ध्वनि से सुसज्जित एक सुंदर, सुव्यवस्थित परिसर लोगों का मन मोह रहा है। एसईसीएल  बैकुंठपुर क्षेत्र के रेस्क्यू विभाग के कर्मियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि उनका दायित्व केवल कोयला उत्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सृजनात्मक पहल भी उनकी कार्यसंस्कृति का हिस्सा है।वर्ष 1990 के दशक में निर्मित रेस्क्यू कार्यालय परिसर में पिछले 36 वर्षों से कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ था। सब कुछ यथावत चल रहा था। किन्तु वर्तमान क्षेत्रीय महाप्रबंधक बी.एन. झा के मार्गदर्शन में रेस्क्यू विभाग के कर्मियों ने स्वयं के श्रमदान और सहयोग से परिसर की सूरत ही बदल दी। 

बेकार पड़ा कोल टब बना आकर्षक फूलों का गमला..... कोयला खदानों में खान के अंदर कोयला परिवहन व अन्य सामान लाने ले जाने हेतु  प्रयुक्त होने वाला लोहे का कोल टब, जो पहले केवल कोयला ढोने के काम आता था, अब उसमें मिट्टी भरकर विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे फूल लगाए गए हैं। जो टब कभी अनुपयोगी प्रतीत होता था, आज वह सृजनात्मक सोच और पुनःउपयोग (रीसाइक्लिंग) का सुंदर उदाहरण बन गया है।

स्वनिर्मित झरना बना आकर्षण का केंद्र.....रेस्क्यू कार्यालय परिसर में कर्मियों ने स्वयं एक आकर्षक कृत्रिम झरने का निर्माण किया है। इसमें खदानों से निकलने वाले बेकार पत्थरों का अत्यंत सुंदर उपयोग किया गया है। झरने से बहते जल की मधुर ध्वनि और चारों ओर खिले रंगीन पुष्प वातावरण को अत्यंत मनोहारी बना देते हैं। यह दृश्य न केवल कर्मचारियों बल्कि आगंतुकों को भी आकर्षित करता है।इस सराहनीय पहल में रेस्क्यू कार्यालय प्रभारी सुशील कुमार के साथ कर्मी सुनील वर्गीस, देवेंद्र जायसवाल , रामसुंदर राजवाड़े ,मोहर साय ,जयकरण राजेश नामदेव ,मोहम्मद ताहिर, विजय खटीक, आशीष शुक्ला, अखिलेश प्रसाद ,महिला कर्मचारी अनूपा, रानी ,नीरा ,शांति, का विशेष योगदान रहा। विशेष रूप से तकनीकी कार्यों में सुनील वर्गीस की भूमिका अत्यंत प्रशंसनीय रही। उनकी पहल और सकारात्मक सोच ने इस विचार को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संदेश स्पष्ट – वेतन से बढ़कर है जिम्मेदारी........रेस्क्यू विभाग के इन कर्मियों ने यह साबित कर दिया कि वे केवल वेतन के लिए कार्य नहीं करते, बल्कि अपने कार्यस्थल को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखने की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभाते हैं।बैकुंठपुर क्षेत्र का यह रेस्क्यू कार्यालय अब केवल एक प्रशासनिक भवन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और टीम भावना का जीवंत उदाहरण बन चुका है।निश्चित ही यह पहल न केवल बैकुंठपुर क्षेत्र बल्कि पूरे एसईसीएल परिवार के लिए प्रेरणास्रोत है। यदि इसी प्रकार प्रत्येक कार्यालय और संस्थान अपने परिसर को हरित और सुंदर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए, तो कार्यस्थल भी सकारात्मक ऊर्जा और प्रकृति के सौंदर्य से परिपूर्ण हो सकते हैं।

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