कोरिया बैकुंठपुर। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को रहेगा। प्रसिद्ध ऋषिकेश पंचांग के अनुसार सूर्य भगवान 14 जनवरी की रात्रि 9:38 बजे धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी कारण संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को प्रातः 1:19 बजे तक मान्य होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित बाल्मिक दुबे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि शास्त्रों के अनुसार संक्रांति का पुण्य काल उसी दिन माना जाता है, जिस दिन सूर्य का संक्रमण होता है।
पंडित दुबे के अनुसार मकर संक्रांति के साथ ही खरमास का समापन हो जाएगा और सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे। उत्तरायण काल को देवताओं का दिन कहा गया है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अवसर पर भगवान सूर्य की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। तीर्थ स्थलों एवं पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि इस पुण्य काल में तिल, खिचड़ी, कंबल, वस्त्र, कपड़ा, अनाज, तुलादान, स्वर्णदान, गोदान एवं अपनी शक्ति व सामर्थ्य के अनुसार नगद राशि का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। विशेष रूप से तिल का दान सूर्य देव को प्रिय माना गया है।
मकर संक्रांति का पर्व सामाजिक समरसता और दान की भावना को प्रबल करता है। इस दिन लोग आपसी वैमनस्य भूलकर एक-दूसरे को तिल-गुड़ खिलाकर शुभकामनाएं देते हैं। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में खिचड़ी, तिल लड्डू और पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं।
पंडित बाल्मिक दुबे ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे शास्त्र सम्मत समय का पालन करते हुए भगवान सूर्य की उपासना करें और यथाशक्ति दान अवश्य करें। उन्होंने अंत में कहा— “जय गौमाता, जय भारत माता”।

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