नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कालरी......एसईसीएल के सभी क्षेत्रों में बुधवार के दिन संयुक्त केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के खिलाफ उग्र और व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। सुबह से ही खदानों के गेट पर हजारों श्रमिक एकजुट होकर काला झंडा और काला फीता पहनकर जमा हुए और केंद्र सरकार के निर्णय को मजदूर वर्ग के विरुद्ध बताते हुए जमकर नारेबाजी की।धरना–प्रदर्शन के दौरान श्रमिक संगठनों ने मांग रखी कि सरकार द्वारा मंजूर किए गए चारों श्रम कोड बिल तुरंत वापस लिए जाएँ, क्योंकि ये मजदूरों की सुरक्षा, अधिकार और स्थाई नौकरी को समाप्त करने की गहरी साजिश हैं।
एसकेएमएस (एटक) के महासचिव कामरेड अजय विश्वकर्मा, एचएमएस के महामंत्री नाथूलाल पांडेय, एसईकेएमसी के महासचिव गोपाल नारायण तथा सीटू के महासचिव वी.एम. मनोहर ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि—आजादी से पहले और बाद में मजदूरों की सुरक्षा हेतु बनाए गए 44 श्रम कानूनों को खत्म कर, उद्योगपतियों के हित में चार कोड लागू करना श्रमिकों के अधिकारों पर सीधा हमला है।
इनके लागू होते ही श्रमिकों के अधिकार स्थाई नौकरी और सुरक्षा प्रभावित होंगे ये संहिताएँ मजदूरों को गुलाम बनाने की साजिश है औरट्रेड यूनियनों को कमजोर करने की कोशिश हैं और मजदूर को गुलाम बनाने की ओर धकेलने वाला कदम।श्रमिक नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि पूरे कोयला उद्योग में आज बड़े पैमाने पर विरोध हुआ है और यदि केंद्र सरकार ने जबरन इन श्रम-विरोधी संहिताओं को लागू करने का प्रयास जारी रखा, तो कोयला उद्योग के सभी कर्मचारी उग्र आंदोलन, खदान बंद हड़ताल और व्यापक राष्ट्रीय संघर्ष के लिए तैयार हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि 26 नवम्बर 2025 को देशभर के मजदूर उद्योगों और खदानों के मुख्य द्वारों पर काला फीता बांधकर और चारों कोड की प्रतियाँ जलाकर यह संदेश दे रहे है कि चार नए श्रम कानून किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं… मजदूर विरोधी नीतियों का प्रतिकार होगा!



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