लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ की धूम: घाटों की सफाई और तैयारियों में जुटे लोग, छठ गीतों से गूंज रहे गांव-शहर


कोरिया बैकुंठपुर । लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारियां एमसीबी और कोरिया जिले में जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। यह पर्व सूर्य उपासना और शुद्ध आचरण का प्रतीक माना जाता है। सूर्यदेव और छठी मइया की उपासना के इस पावन पर्व को लेकर पूरे जिले में आस्था और उत्साह का माहौल है। शहर से लेकर गांवों तक गली-गली में छठ गीतों की मधुर धुनें गूंज रही हैं, वहीं घाटों की सफाई का काम भी तेजी से जारी है। 

जिले के बैकुंठपुर क्षेत्र के बाजार पारा छठ घाट, गढ़ेल पारा छठ घाट, चरचा छठ घाट, हसदेव नदी तट, सोनहत, मनेंद्रगढ़, पटना और चिरमिरी क्षेत्र के प्रमुख घाटों पर नगर पालिका और ग्राम पंचायतों द्वारा विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। घाटों पर सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। महिलाओं की टोली सुबह-शाम मिलकर घाटों की सफाई और सजावट में सहयोग कर रही हैं।

इस बार छठ पर्व 25 अक्टूबर से शुरू होगा, जब व्रतिन “नहाय-खाय” की परंपरा निभाएंगे। इसके तहत श्रद्धालु नदी या तालाब में स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करेंगे। इसके बाद 26 अक्टूबर को “खरना” मनाया जाएगा, जब व्रतिन गुड़ की खीर और रोटी बनाकर पूजा के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे। 27 अक्टूबर को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा, जब महिलाएं सूर्यास्त के समय नदी या तालाब के किनारे डूबते सूरज को अर्घ्य अर्पित करेंगी। वहीं 28 अक्टूबर की सुबह उगते सूर्य को “उषा अर्घ्य” देने के साथ ही चार दिवसीय छठ व्रत का समापन होगा। 

कोरिया जिले में इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु छठ व्रत रखेंगे। व्रतिन महिलाएं अब से ही गेहूं धोकर सुखाने और उसे शुद्धता से पीसने में जुटी हैं। बाजार में बांस की टोकरी, सुपली, डलिया, फल, नारियल, नींबू, गन्ना और छठ पूजा से जुड़ी वस्तुओं की मांग जोरों पर है। दुकानों में पूजन सामग्री, दीये, फल और सजावटी सामान की भरमार देखी जा सकती है।

छठ पूजा के दौरान नदी घाटों पर भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल की तैनाती करने का निर्णय लिया है।  महिला पुलिसकर्मी और स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल टीमें घाटों पर मौजूद रहेंगी। वहीं बिजली विभाग को घाटों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

छठ गीतों से अब गांव-गांव में भक्ति और उल्लास का माहौल है। महिलाएं “केलवा जस पनिया...” जैसे पारंपरिक गीत गाते हुए पूजा की तैयारियों में जुटी हैं। कोरिया जिले में यह पर्व केवल आस्था नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बन गया है।

जैसे-जैसे छठ पर्व के दिन नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं का उत्साह और भक्ति भाव बढ़ता जा रहा है। जिले का हर कोना सूर्य उपासना के इस अनुपम पर्व की पवित्र आभा में डूबने को तैयार है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ