नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

कोरिया चरचा कालरी ........कोरिया जिले का गौरव एवं चरचा कॉलरी क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली अखिल भारतीय सेशन स्मृति गोल्ड कप फुटबॉल प्रतियोगिता, जो वर्षों तक क्षेत्र में पर्व और उत्सव की तरह मनाई जाती रही, अब आयोजन समिति के कुछ पदाधिकारियों की कथित वित्तीय अनियमितताओं के कारण विवादों में घिरती दिखाई दे रही है।

लगभग 50 वर्षों के गौरवशाली इतिहास वाली इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता का गोल्डन जुबली वर्ष फरवरी 2026 में बड़े स्तर पर आयोजित किया गया था। प्रतियोगिता के आयोजन में प्रतिवर्ष लाखों रुपये का व्यय होता है, जिसकी वित्तीय पारदर्शिता और सुचारु संचालन के लिए समिति द्वारा कोषाध्यक्ष को जिम्मेदारी सौंपी जाती है।किन्तु सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष द्वारा लगभग 1 लाख 85 हजार रुपये का स्पष्ट हिसाब अब तक प्रस्तुत नहीं किया गया है। प्रतियोगिता समाप्त हुए चार महीने बीत जाने के बावजूद आयोजन समिति के जिम्मेदार पदाधिकारी इस मामले में आंखें मूंदे बैठे हैं तथा किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

जानकारों का कहना है कि समिति के अन्य पदाधिकारियों को भी पूरे मामले की जानकारी है। यहां तक कि कॉलरी प्रबंधन के कार्मिक विभाग द्वारा भी संबंधित कोषाध्यक्ष से जानकारी एवं भुगतान के संबंध में जवाब मांगा जा रहा है, किन्तु हर माह भुगतान करने और हिसाब देने का आश्वासन देकर मामले को टाला जा रहा है।आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष स्वयं कॉलरी कर्मचारी हैं और उनका मासिक वेतन लगभग लाख रुपये के आसपास है। ऐसे में यदि उनके द्वारा भुगतान और हिसाब प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है तो कॉलरी प्रबंधन को उनके वेतन से राशि समायोजित करने अथवा अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर विचार करना चाहिए।

सूत्रों के अनुसार आयोजन समिति द्वारा स्थानीय व्यापारियों एवं अन्य लोगों का भुगतान भी अब तक लंबित है। संबंधित लोगों को "अगले माह भुगतान कर दिया जाएगा” कहकर लगातार टाला जा रहा है, जिससे क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है।क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस गौरवशाली और ऐतिहासिक आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों द्वारा लाखों रुपये का हिसाब प्रस्तुत नहीं करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं चिंताजनक है। आयोजन समिति के अध्यक्ष, जो स्वयं चरचा क्षेत्र के मुखिया एवं क्षेत्र प्रबंधक हैं, उन्हें मामले का तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए ताकि इस प्रतिष्ठित महाआयोजन की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रहे।

जानकारी के अनुसार आयोजन समिति के उपाध्यक्ष, सचिव, सहसचिव सहित अन्य पदाधिकारियों द्वारा भी कई बार कोषाध्यक्ष से भुगतान एवं हिसाब प्रस्तुत करने का अनुरोध किया जा चुका है, किन्तु अब तक कोई सकारात्मक पहल सामने नहीं आई है।