चरचा के विकास के दावों पर उठे सवाल, कटघोड़ी सड़क निर्माण को बताया भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत


कोरिया बैकुंठपुर / शिवपुर चरचा। कोरिया जिले में नगरीय निकाय चुनाव का माहौल बनने के साथ ही विकास कार्यों और जनहित से जुड़े मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। बैकुंठपुर और शिवपुर-चरचा नगरीय निकाय क्षेत्रों में जहां राजनीतिक दल अपने-अपने कार्यकाल के विकास कार्यों को उपलब्धि के रूप में जनता के सामने रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर कुछ ऐसे सवाल भी उठ रहे हैं, जिनका जवाब आने वाले समय में नगर सरकार और राजनीतिक दलों को देना होगा।

इसी क्रम में शिवपुर-चरचा क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार एवं क्षेत्र के जिम्मेदार नागरिक द्वारा नगरीय क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि लंबे समय से चली आ रही जनहित की मांगें पूरी नहीं होती हैं तो आम जनता के बीच असंतोष स्वाभाविक है। यहां तक कि मतदान नहीं करने अथवा मतदान के बहिष्कार जैसी बात सामने आना भी इस बात का संकेत है कि लोगों की अपेक्षाओं और विकास कार्यों के बीच कहीं न कहीं अंतर बना हुआ है।

जायज मांगों पर पक्ष-विपक्ष दोनों को गंभीरता से करना होगा विचार

वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि शिवपुर-चरचा क्षेत्र की मांगें किसी एक राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष से जुड़ी हुई नहीं हैं, बल्कि यह क्षेत्र के भविष्य से संबंधित विषय हैं। नगर पालिका परिषद में सत्ता में रहने वाले दल से लेकर विपक्ष तक सभी राजनीतिक दलों को इन मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए।

उनका कहना है कि जनता चुनाव के समय केवल राजनीतिक नारों या वादों को नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र में हुए वास्तविक विकास कार्यों को भी देखती है। सड़क, रोजगार, आवागमन और क्षेत्र के भविष्य से जुड़े मुद्दे आज भी लोगों के बीच महत्वपूर्ण हैं।

वरिष्ठ राजनेता ने कहा—पूर्व के कार्यों के आधार पर जनता चुनेगी नगर सरकार

इन मुद्दों को लेकर जब एक वरिष्ठ पत्रकार ने वरिष्ठ राजनेता से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि आगामी नगरीय निकाय चुनाव में जनता पूर्व में किए गए कार्यों का मूल्यांकन करेगी। जनता यह देखेगी कि पूर्व में नगर और क्षेत्र के विकास के लिए क्या काम किए गए तथा उसका आम लोगों को कितना लाभ मिला।

वरिष्ठ राजनेता के अनुसार पूर्व में किए गए कार्यों और उपलब्धियों के आधार पर राजनीतिक दलों को चुनाव में लाभ मिल सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय पूरी तरह जनता के हाथ में होगा और मतदाता अपने अनुभव तथा क्षेत्र की आवश्यकताओं के आधार पर नगर सरकार का चुनाव करेंगे।

62 वर्ष पुरानी चरचा खदान के भविष्य को लेकर चिंता

वरिष्ठ पत्रकार ने कोरिया जिले की आर्थिक और औद्योगिक स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि कोरिया जिला उद्योगों की दृष्टि से पहले से ही सीमित संसाधनों वाला क्षेत्र है। जिले में चंद कोयला खदानें ही प्रमुख आर्थिक गतिविधियों का आधार हैं। ऐसे में चरचा की लगभग 62 वर्ष पुरानी कोयला खदान का भविष्य भी क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि आने वाले वर्षों में चरचा खदान बंद होती है तो इसका सीधा असर यहां रहने वाले हजारों लोगों पर पड़ सकता है। खदान से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े परिवारों, छोटे व्यापारियों, परिवहन व्यवसाय तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका है।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते वैकल्पिक आर्थिक और विकास का रास्ता तैयार नहीं किया गया तो एक ऐतिहासिक कोयला नगरी धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में सिमट सकती है।

चरचा-कटघोरी सड़क को बताया क्षेत्र के भविष्य की महत्वपूर्ण कड़ी


वरिष्ठ पत्रकार ने क्षेत्र के भविष्य के लिए चरचा-कटघोरी सड़क निर्माण को महत्वपूर्ण विकल्प बताया है। उनका मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क किसी भी क्षेत्र के विकास की आधारभूत आवश्यकता है। यदि चरचा को कटघोरी से बेहतर सड़क मार्ग से जोड़ा जाता है तो इससे आवागमन के साथ-साथ व्यापार, रोजगार, परिवहन और क्षेत्र में भविष्य की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।

उनका कहना है कि सड़क निर्माण केवल वर्तमान की सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है। खदान आधारित अर्थव्यवस्था के भविष्य को देखते हुए क्षेत्र में वैकल्पिक आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी आवश्यक है।

“चरचा को बचाना है तो भविष्य की योजना अभी से बनानी होगी”

वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि चरचा को बचाने के लिए केवल वर्तमान समस्याओं पर चर्चा करना पर्याप्त नहीं होगा। क्षेत्र के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना बनानी होगी। रोजगार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और अन्य नागरिक सुविधाओं के विस्तार के साथ क्षेत्र को ऐसी कनेक्टिविटी उपलब्ध करानी होगी, जिससे खदान आधारित अर्थव्यवस्था के बाद भी चरचा का अस्तित्व और विकास कायम रह सके।

उन्होंने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि चरचा-कटघोरी सड़क निर्माण की मांग को व्यापक जनहित के मुद्दे के रूप में आगे बढ़ाया जाए।

उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति, दल या संगठन की मांग नहीं है, बल्कि चरचा के भविष्य से जुड़ा सवाल है। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस पहल होती है तो क्षेत्र को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है।

“चरचा को बचाना है, तो आज ही भविष्य की लड़ाई लड़नी होगी। चरचा-कटघोरी सड़क निर्माण के लिए सभी का सहयोग अपेक्षित है।”

आगामी नगरीय निकाय चुनाव में जनता इन मुद्दों को किस नजरिए से देखती है और राजनीतिक दल चरचा के भविष्य को लेकर क्या ठोस रोडमैप सामने रखते हैं, यह आने वाला समय तय करेगा। फिलहाल क्षेत्र में विकास के दावों के बीच चरचा-कटघोड़ी सड़क निर्माण की मांग एक महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे के रूप में सामने आ रही है।

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