नगर पालिका शिवपुर चरचा में 3449 मतदाता घटे, लेकिन पुराने आंकड़ों पर किया आरक्षण!.... चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल..... किस वर्ग के कितने मतदाता घटे ,प्रशासन के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं..... वर्तमान मतदाता सूची, जातिगत आंकड़ों, आरक्षण रोस्टर और परिसीमन की निष्पक्ष जांच की मांग....; चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल.....चरचा बचाव मंच ने जांच एवं कार्यवाही हेतु कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन.......



नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

चरचा कालरी...... नगर पालिका शिवपुर-चरचा में आगामी नगरीय निकाय निर्वाचन 2026 को लेकर वार्ड आरक्षण प्रक्रिया में आंकड़ों के आधार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वर्ष 2021 और वर्ष 2026 की मतदाता सूचियों में बड़ी संख्या में मतदाताओं की कमी सामने आने के बाद वर्तमान मतदाता संख्या और आरक्षण प्रक्रिया में प्रयुक्त आंकड़ों के बीच अंतर की जांच की मांग की गई है। चरचा बचाव मंच का कहना है कि यदि वर्तमान सामाजिक एवं मतदाता संरचना में बड़ा बदलाव आया है और आरक्षण के लिए पुराने आंकड़ों को आधार बनाया गया है, तो इससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर प्रश्न उत्पन्न होना स्वाभाविक है।

इसी मुद्दे को लेकर चरचा बचाव मंच के पदाधिकारी  नीरज गुप्ता,प्रकाश शर्मा, राजेश्वर चंद्रा, मोहम्मद आरिफ  ने बुधवार को कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला कोरिया के कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। साथ ही सचिव छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग को भी पत्र प्रेषित कर जांच की मांगकी ज्ञापन में 28 सितंबर 2026 को नगर पालिका शिवपुर-चरचा के 15 वार्डों के लिए संपन्न आरक्षण प्रक्रिया से संबंधित आंकड़ों की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।

*पांच साल में 3449 मतदाता कम, आंकड़ों के आधार पर उठे सवाल*......मंच ने ज्ञापन में कहा कि वर्ष 2021 में नगर पालिका के 15 वार्डों में कुल 12,335 मतदाता दर्ज थे, जबकि 5 मई 2026 को जारी मतदाता सूची के अनुसार कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 8,886 रह गई है। इस प्रकार लगभग पांच वर्षों में 3,449 मतदाताओं की कमी, यानी करीब 28 प्रतिशत की गिरावट सामने आती है।

मंच के अनुसार पुरुष मतदाताओं की संख्या में लगभग 1,810 तथा महिला मतदाताओं की संख्या में लगभग 1,639 की कमी बताई गई है। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की कमी के बाद नगर की वर्तमान सामाजिक एवं मतदाता संरचना में भी बदलाव होना स्वाभाविक है। ऐसे में आरक्षण प्रक्रिया में प्रयुक्त जातिगत एवं अन्य आंकड़ों का वर्तमान मतदाता सूची से मिलान एवं सत्यापन कराया जाना आवश्यक है।

*कई वार्डों में 40 प्रतिशत तक मतदाता घटे*.....ज्ञापन में वार्डवार मतदाता संख्या में आए बदलाव को भी प्रमुखता से उठाया गया है। मंच के अनुसार वार्ड क्रमांक 4 में वर्ष 2021 के 1,037 मतदाताओं की संख्या वर्ष 2026 में घटकर 587 रह गई है अर्थात 43.5% मतदाता घाटे। इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 6 में 997 से घटकर 579 रह गए इस वार्ड में 418 मतदाता कम हुए अर्थात 42% मतदाता कम हुए, जबकि वार्ड क्रमांक 2 में वर्ष 2021 के 1,261 मतदाता वर्ष 2026 में घटकर 786  रह गए हैं। मतलब 475 मतदाता अन्यत्र चले गए इस वार्ड में 38.5% मतदाताओं की कमी हुई,वार्ड क्रमांक 13 में भी 862 से घटकर 567 मतदाता दर्ज किए गए हैं अर्थात 295 मतदाताओं की संख्या इस वार्ड में कम हुई और मतदाताओं के कम  होने का आंकड़ा 34% हो गया  इस तरह नगर पालिका शिवपुर चरचा के 14 वार्डों में मतदाताओं की संख्या में भारी कमी हुई है मंच ने कहा कि कई वार्डों में मतदाताओं की संख्या में इतनी बड़ी कमी के कारणों का प्रशासनिक स्तर पर सत्यापन आवश्यक है। साथ ही यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मतदाताओं की कमी किन कारणों से हुई और आरक्षण प्रक्रिया में वर्तमान आंकड़ों को किस प्रकार शामिल किया गया है। जबकि जिला प्रशासन को मतदाताओं की संख्या कम होने का पूरा संज्ञान था

आरक्षित वार्डों में वर्तमान जातिगत आंकड़ों के सत्यापन की मांग.....चरचा बचाव मंच ने अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किए गए वार्डों के जातिगत आंकड़ों की भी जांच की मांग की है। ज्ञापन के अनुसार वार्ड क्रमांक 4 में वर्ष 2021 के आधार पर एसटी मतदाताओं का प्रतिशत 35.72 प्रतिशत तथा वार्ड क्रमांक 12 में 38.09 प्रतिशत बताया गया था।मंच का कहना है कि इन वार्डों की कुल मतदाता संख्या में भी उल्लेखनीय बदलाव हुआ है। इसलिए वर्तमान मतदाता सूची के आधार पर आरक्षित वार्डों में एसटी सहित अन्य वर्गों के मतदाताओं की वास्तविक संख्या एवं प्रतिशत का सत्यापन कराया जाना चाहिए, ताकि आरक्षण का आधार स्पष्ट और प्रमाणित हो सके। जिला प्रशासन की यह नहीं मालूम कि नगर पालिका शिवपुर चर्चा में घटे 3449 मतदाता किस वर्ग के थे जिला प्रशासन के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है जिससे वह स्पष्ट कर सके कि एसटी,एससी ओबीसी या सामान्य किस वर्ग के कितने मतदाता कम हुए

लगातार अनारक्षित रहने वाले वार्डों के रोस्टर की भी जांच......ज्ञापन में आरक्षण रोस्टर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मंच ने बताया कि वार्ड क्रमांक 7 बाल गंगाधर तिलक वार्ड वर्ष 2016, 2021 और अब 2026 में भी अनारक्षित मुक्त रखा गया है। इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 15 डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्ड भी वर्ष 2021 में अनारक्षित था और इस बार भी इसी श्रेणी में रखा गया है।मंच ने मांग की है कि संबंधित वार्डों के पूर्व आरक्षण क्रम एवं लागू आरक्षण रोस्टर का परीक्षण कर यह स्पष्ट किया जाए कि लगातार एक ही श्रेणी में आरक्षण निर्धारित किए जाने का आधार क्या है।

लंबे समय से लंबित परिसीमन 

चरचा बचाव मंच ने नगर पालिका के वार्ड परिसीमन को भी महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि लगभग 25 वर्षों के लंबे समय से परिसीमन नहीं होने के कारण वार्डों के क्षेत्रफल और मतदाता संख्या में असमानता दिखाई देती है। मंच के अनुसार नगर पालिका का कुल क्षेत्रफल लगभग 10.38 वर्ग किलोमीटर है, जबकि वार्ड क्रमांक 1 का क्षेत्रफल लगभग 6.30 वर्ग किलोमीटर बताया गया है। वहीं वार्ड क्रमांक 3 का क्षेत्रफल लगभग 0.17 वर्ग किलोमीटर बताया गया है।मंच ने जनसंख्या एवं वर्तमान मतदाता संख्या के अनुरूप वार्डों का संतुलित परिसीमन किए जाने की मांग की है।

पारदर्शिता के लिए आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग......मंच ने कलेक्टर से वार्ड आरक्षण एवं परिसीमन से संबंधित आधारभूत आंकड़े, जातिगत आंकड़े, आरक्षण रोस्टर एवं प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि आम नागरिकों को दावा-आपत्ति एवं सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर मिल सके।

चरचा बचाव मंच ने कहा कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, वर्ग अथवा राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में जाना नहीं है। मंच की मांग केवल इतनी है कि निर्वाचन से जुड़ी प्रक्रियाएं वर्तमान, प्रमाणित एवं सत्यापित आंकड़ों के आधार पर पारदर्शी और नियमानुसार संपन्न हों। मतदाता संख्या में हजारों की कमी और वार्डवार आंकड़ों में सामने आए अंतर को देखते हुए यदि आंकड़ों का समुचित सत्यापन नहीं किया गया तो चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर आम नागरिकों के बीच सवाल बने रह सकते हैं। इसलिए निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर किसी भी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे, इसके लिए संबंधित आंकड़ों की निष्पक्ष जांच एवं सार्वजनिक स्पष्टीकरण आवश्यक है।

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