मूल बीज मंत्र -
ॐ ह्रीं कामाख्ये देव्यै नमः॥
(इस मंत्र का 108 बार जाप अति फलदायी है)
पवित्र स्तुति -
नमो कामाख्या महामाया, योनिपीठ निवासिनी।
सृष्टि-स्थिति-संहारिणी, सर्व-सिद्धि प्रदायिनी॥
रक्तवस्त्रा रक्तपुष्पा, रक्त-सिंदूर भूषिता।
श्वेत-कमल मालिनी देवी, कुंड-तीर्थ प्रकाशिनी॥
जल-धारा स्वरूपा त्वं, ज्योति-स्वरूपा सनातनी।
अंबुबाची स्वरूपा त्वं, जगन्माता नमोऽस्तुते॥
योनौ विश्वं स्थितं मातः, त्वयि ब्रह्माण्डम् आश्रितम्।
त्वं आदि, त्वं अनादि, त्वं एव परमा गतिः॥
फलश्रुति -
जो भक्त इस स्तुति का प्रातःकाल शुद्ध मन से पाठ करता है, माँ कामाख्या उसकी समस्त कामनाओं को पूर्ण करती हैं, संतान सुख, सौभाग्य और मोक्ष प्रदान करती हैं।

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