कोरिया बैकुंठपुर। कोरिया जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ में सोमवार को “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव के वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर देशभर के श्रद्धालु गुजरात स्थित ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर से वर्चुअल माध्यम से जुड़े और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई विशेष पूजा-अर्चना का अवलोकन करते हुए उनका संबोधन सुना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मंदिर भारत की अटूट आस्था, सांस्कृतिक चेतना और पुनर्निर्माण की अद्भुत परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने विदेशी आक्रांताओं द्वारा किए गए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि अनेक बार विध्वंस के बावजूद भी भारत की धार्मिक आस्था को कभी समाप्त नहीं किया जा सका। सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण देश की सांस्कृतिक शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि केंद्र सरकार देशभर के धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों का विकास नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करना और आने वाली पीढ़ियों तक इसे सुरक्षित पहुंचाना है।
इधर कोरिया जिले में “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के अंतर्गत जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन प्रेमाशंकर महादेव मंदिर परिसर में देवरहा बाबा समिति के समन्वय से किया गया। यह आयोजन सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चला, जिसमें जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना की गई और धर्म एवं संस्कृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की गई। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा, जहां श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लेकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। इस दौरान रामायण पाठ एवं धार्मिक भजनों का आयोजन भी किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल बना रहा।
आयोजन की एक विशेषता यह रही कि श्रद्धालु वर्चुअल माध्यम से राज्य स्तरीय कार्यक्रम से भी जुड़े रहे और प्रधानमंत्री के संबोधन को एक साथ सुना। इससे कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप मिला और लोगों में सांस्कृतिक एकता एवं गर्व की भावना और अधिक प्रबल हुई।
इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारत की समृद्ध संस्कृति, इतिहास और आत्मगौरव का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों से समाज में धार्मिक जागरूकता बढ़ती है और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।
कुल मिलाकर, “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” ने कोरिया जिले सहित पूरे प्रदेश में आस्था, एकता और सांस्कृतिक चेतना का संदेश दिया तथा लोगों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।




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