राष्ट्रीय प्रेस परिषद दिवस , छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता, तथा सरगुजा संभाग की स्थिति, कोरिया जिला विशेष,


कोरिया बैकुंठपुर। राष्ट्रीय प्रेस परिषद दिवस पत्रकारिता की स्वतंत्रता, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व के महत्व को रेखांकित करता है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग और कोरिया जिले की पत्रकारिता की यात्रा, उपलब्धियां तथा विभिन्न कालखंडों की परिस्थितियों को समझना आवश्यक हो जाता है।

छत्तीसगढ़ का सरगुजा संभाग पत्रकारिता की दृष्टि से सदैव सक्रिय रहा है। अंबिकापुर सहित कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर क्षेत्र में स्थानीय मुद्दों को स्वर देने की परंपरा दशकों से चली आ रही है। पहाड़ी अंचल, आदिवासी संस्कृति, खनिज संपदा और जनहित से जुड़े विषयों को स्थानीय पत्रकारों ने हमेशा साहसपूर्वक उठाया। सरगुजा पत्रकारिता की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां के पत्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद अपने नैतिक दायित्व और जनभावनाओं को प्राथमिकता देते आए हैं।

कोरिया जिले में पत्रकारिता का इतिहास और विकास

कोरिया जिला, जो कभी कोरिया रियासत की महत्वपूर्ण इकाई रहा, यहां पत्रकारिता का बीजारोपण रियासती दौर में ही दिखाई देता है। महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव के शासनकाल में रियासत प्रशासन जनमत को महत्व देता था और लिखित संवादों, राजपत्रों तथा सामाजिक सूचनाओं के आदान–प्रदान का एक सुव्यवस्थित तंत्र था। यद्यपि आधुनिक अर्थों में समाचार पत्रों का प्रसार उस समय सीमित था, परन्तु बौद्धिक वर्ग, शिक्षित युवाओं तथा रियासती अधिकारियों के बीच लेखन, सूचनाओं का आदान-प्रदान और सामुदायिक संवाद की मजबूत परंपरा ने आगे चलकर आधुनिक पत्रकारिता की नींव रखी।

स्वतंत्रता के बाद और विशेष रूप से कोरिया के भू-राजनीतिक महत्व बढ़ने के साथ पत्रकारिता का स्वरूप अधिक सक्रिय हुआ। खनन, रेल परियोजनाओं, औद्योगिक विकास, विस्थापन, रोजगार और ग्रामीण जीवन से जुड़ी खबरों ने कोरिया को राज्य में एक महत्वपूर्ण मीडिया क्षेत्र के रूप में स्थापित किया।

डॉ. रामचंद्र सिंह देव के काल में पत्रकारिता

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री डॉ. रामचंद्र सिंह देव के दौर में पत्रकारिता को नई ऊर्जा और दिशा मिली। यह समय राज्य निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण और जनसरोकारों के विस्तार का था। कोरिया जिले में भी स्थानीय पत्रकारों को सरकारी कार्यक्रमों की पारदर्शिता, आर्थिक नीतियों, जल–जंगल–जमीन से जुड़े मुद्दों और ग्रामीण विकास योजनाओं की सतत निगरानी का अवसर मिला। डॉ. सिंह देव संवादप्रिय नेता थे; मीडिया को लोकतंत्र की आधारशिला मानते हुए वे पत्रकारों को जानकारी उपलब्ध कराने और जमीनी सवालों पर प्रतिक्रिया देने को तत्पर रहते थे। इस कारण कोरिया जिले की पत्रकारिता ने इस काल में पेशेवर नैतिकता, पड़ताल और सामाजिक उत्तरदायित्व के नए आयाम स्थापित किए।

आज की पत्रकारिता: चुनौतियां और उपलब्धियां

आज सरगुजा संभाग और कोरिया जिले में पत्रकारिता डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी सोशल मीडिया रिपोर्टिंग, ऑनलाइन पोर्टल और वीडियो पत्रकारिता तेजी से बढ़ी है। अनेक युवा पत्रकार जमीनी मुद्दे—पेंशन, राशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, खनन प्रभाव, पर्यावरण और प्रशासनिक पारदर्शिता—को मजबूती से उठा रहे हैं।

राष्ट्रीय प्रेस परिषद दिवस हमें remind करता है कि सत्य, निष्पक्षता और जनहित पत्रकारिता की आत्मा है। सरगुजा और कोरिया की पत्रकारिता ने हमेशा इन मूल्यों को जीवित रखा है और आगे भी यही मार्गदर्शन लोकतंत्र की मजबूती का आधार बनेगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ