नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कालरी.......लगातार बढ़ते अपराधों और प्रशासनिक लापरवाही ने अब चरचा क्षेत्र को असुरक्षित बना दिया है। बीते पंद्रह दिनों में यह दूसरी बड़ी घटना है, जब हथियारबंद गिरोहों ने खदान परिसर में घुसकर खुलेआम चोरी और लूट को अंजाम दिया।15 अक्टूबर की रात्रि चर्चा ईस्ट खदान के मुहाड़ा क्षेत्र में लगभग 27 नकाबपोश बदमाशों का गिरोह खदान के अंदर घुस गया। गिरोह ने खदान के अंदर से लाखों रुपये मूल्य का लगभग 400 मीटर लंबा आर्म्ड बिजली केबल काटकर ले गए। इस पूरे वारदात दौरान उन्होंने वहां ड्यूटी पर तैनात चार कर्मचारियों को बंधक बनाकर रखा वहीं बाद में पहुंचे एक इलेक्ट्रीशियन को जान से मारने की धमकी देकर वहीं बैठा लिया। घटना कई घंटों तक चलती रही, लेकिन न तो विभागीय सुरक्षा बल ने कोई प्रतिरोध किया, न ही पुलिस की कोई टीम मौके पर पहुंची।सूत्रों के अनुसार, गिरोह ने पूरी योजना बनाकर इस वारदात को अंजाम दिया। केबल काटने के लिए उन्होंने उन्नत औजारों का इस्तेमाल किया। उल्लेखनीय है कि केवल पंद्रह दिन पहले ही इसी क्षेत्र में हथियारबंद गिरोह द्वारा चर्चा बेस्ट खदान के अंदर घुसकर डेढ़ सौ फीट लंबा केवल काटा गया इसके अतिरिक्त पावर हाउस से 3.3 केवी की बिजली की आपूर्ति करने वाले विद्युत प्रवाहित केबल काटने की घटना घट चुकी थी, जिसके बावजूद न तो एसईसीएल प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ की, और न ही पुलिस ने किसी तरह की कार्रवाई की।
सुरक्षा व्यवस्था महज़ दिखावा साबित.......चर्चा ईस्ट खदान परिसर में करोड़ों रुपये मूल्य की सामग्री खुले में रखी रहती है, लेकिन उसकी सुरक्षा के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। विभागीय सुरक्षा बल का आकार बड़ा होने के बावजूद उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। सुरक्षा विभाग और सह क्षेत्र प्रबंधक (भू-संपत्ति अधिकारी) की जिम्मेदारी बनती है कि वे एसईसीएल की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करें, किंतु लगातार हो रही वारदातें उनकी कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती हैं। आखिर क्या कारण है कि क्षेत्र प्रबंधक चोरियों को रोकने में नाकाम साबित हो रहे है, चोरी रोकने हेतु उच्च स्तरीय प्रयास क्यों नहीं किया गया,,एसईसीएल को लगातार हो रही आर्थिक क्षति के लिए कौन जिम्मेदार है।
पुलिस प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध...... चरचा थाना क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से अपराधी गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी हुई है। कई घटनाओं की जानकारी मिलने के बावजूद पुलिस की कार्यवाही केवल कागजों तक सीमित रही है। क्षेत्र में अपराधियों के बढ़ते मनोबल का कारण यही ढिलाई मानी जा रही है। जनता का कहना है कि पुलिस और सुरक्षा विभाग की नाकामी के कारण अब अपराधियों को सरकारी परिसरों तक में वारदात करने से डर नहीं रहा।
जनता में दहशत, प्रबंधन मौन.......
लगातार हो रही इन घटनाओं से क्षेत्र के मजदूर, कर्मचारी और आम नागरिक दहशत में हैं। लोगों ने मांग की है कि चर्चा ईस्ट खदान की सुरक्षा की गहन जांच की जाए, गिरोहों की पहचान कर त्वरित गिरफ्तारी हो तथा विभागीय और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह क्षेत्र संगठित अपराधियों के लिए सुरक्षित अड्डा” बन सकता है, जहां कानून और सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों में सिमटकर रह जाएगी।

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