रायपुर कोरिया। यूनिसेफ इंडिया की चीफ ऑफ फील्ड सर्विसेज सोलेदाद हेरेरो ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर और कोंडागांव जिलों के दो दिवसीय दौरे का समापन किया। इस दौरान उन्होंने दूरस्थ आदिवासी समुदायों में बच्चों और परिवारों के लिए स्वास्थ्य, पोषण, पेयजल, सामाजिक सुरक्षा तथा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने हेतु राज्य सरकार द्वारा संचालित अभिनव पहलों का अवलोकन किया। इस अवसर पर उनके साथ यूनिसेफ छत्तीसगढ़ की प्रमुख सीमा कुमार तथा यूनिसेफ की राज्य टीम के सदस्य भी उपस्थित रहे।

नारायणपुर जिले के अकाबेड़ा गांव में सोलेदाद हेरेरो ने समुदाय के सदस्यों, फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं तथा स्थानीय अधिकारियों से संवाद किया और आवश्यक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए संचालित विभिन्न पहलों को नजदीक से देखा। इनमें हाट बाजार में आयोजित स्वास्थ्य शिविर, गंभीर तीव्र कुपोषण से पीड़ित बच्चों के लिए संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने वाली मोटरसाइकिल एम्बुलेंस सेवा तथा दूरस्थ समुदायों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने वाली ‘सुशासन एक्सप्रेस’ जैसी पहलें शामिल थीं।

दौरे के दौरान सोलेदाद हेरेरो, सीमा कुमार और यूनिसेफ छत्तीसगढ़ की टीम ने नारायणपुर की जिला कलेक्टर नम्रता जैन से भी मुलाकात की और जिले में महिलाओं एवं बच्चों के हित में नवाचार आधारित हस्तक्षेपों को आगे बढ़ाने के लिए उनके प्रयासों, नेतृत्व और प्रतिबद्धता की सराहना की।

कोंडागांव में सोलेदाद हेरेरो, सीमा कुमार और यूनिसेफ की टीम ने ‘आओ बात करें’ पहल के प्रतिभागियों तथा ‘युवोदय’ स्वयंसेवी नेटवर्क के सदस्यों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य, बाल संरक्षण और युवाओं की सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए समुदाय आधारित प्रयासों की जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने प्रेरणादायक युवा परिवर्तनकर्ताओं से भी मुलाकात की, जिनमें तनु यादव शामिल थीं, जिन्होंने त्वचा के रंग के कारण भेदभाव का सामना कर रहे एक बच्चे के समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं धर्मेश, जो युवोदय नेटवर्क के स्वयंसेवक हैं, ने पॉक्सो (POCSO) शिकायत पेटियों की स्थापना में सहयोग किया तथा अपने समुदाय में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में सक्रिय योगदान दिया। इन युवाओं की कहानियों ने यह दर्शाया कि युवाओं का नेतृत्व बच्चों और किशोरों के लिए अधिक सुरक्षित, समावेशी और संवेदनशील वातावरण निर्माण में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सोलेदाद हेरेरो और सीमा कुमार ने कोंडागांव की जिला कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना से भी मुलाकात की। बैठक में विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा सफल मॉडलों को सरकारी तंत्र के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ एवं विस्तारित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

इस अवसर पर सोलेदाद हेरेरो ने कहा, “नारायणपुर और कोंडागांव जैसे दूरस्थ जिलों में छत्तीसगढ़ की नवाचारी और समुदाय-आधारित पहलें यह दर्शाती हैं कि मजबूत साझेदारियां तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित समाधान बच्चों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं, विशेषकर तब जब वे विकासोन्मुखी नीतियों पर आधारित हों। बस्तर जैसे क्षेत्रों में, जहां चुनौतियां सबसे अधिक हैं, वहीं परिवर्तन की संभावनाएं भी सबसे व्यापक हैं।”

दौरे का समापन बाल-केंद्रित विकास को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत साझेदारियों, समुदाय की सक्रिय भागीदारी और स्थानीय स्तर पर विकसित समाधानों को प्रोत्साहित करने संबंधी विचार-विमर्श के साथ हुआ। इस यात्रा ने यूनिसेफ और छत्तीसगढ़ सरकार की उस साझा प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया, जिसके तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि दूरस्थ एवं वंचित समुदायों में रहने वाले प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित जीवन, समुचित विकास और अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुंचने का अवसर प्राप्त हो।