कोरिया छत्तीसगढ।  "अमेरिका के टेक्सास चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल" में हुई इस सर्जरी ने साबित कर दिया;

 कि "जब डॉक्टर के हाथों में हुनर हो और दिल में किसी मासूम की जान बचाने की ज़िद", 

तो "नामुमकिन जैसा कुछ नहीं होता"....,

और ईश्वर भी ऐसे काम में सदैव मार्गदर्शन देते रहते हैं....! 

              "सिर्फ 23 हफ्ते की गर्भ में पल रही एक नन्हीं सी बच्ची को रीढ़ की हड्डी के पास एक बेहद खतरनाक ट्यूमर हो गया था"। 

और "उस मासूम का दिल धीरे-धीरे जवाब दे रहा था"। 

ऐसे नाजुक मोड़ पर नाइजीरिया में जन्मे और

 "दुनिया के बेहतरीन बाल सर्जनों में शुमार डॉ. ऑलुयिंका ओलुतोए (Dr. Oluyinka Olutoye)" और उनकी टीम ने एक ऐसा साहसिक फैसला लिया ;

जिसने सचमुच इतिहास रच दिया....।

उन्होंने माँ के गर्भ का ऑपरेशन किया, 

"23 हफ्ते की नन्हीं बच्ची को आधा बाहर निकाला, 

सिर्फ 5 मिनट के बेहद जोखिम भरे उस ऑपरेशन में उस ट्यूमर को काटकर अलग किया, और फिर बच्ची को वापस माँ की कोख में सुरक्षित रखकर सील कर दिया...."। 

"बच्ची माँ के गर्भ में दोबारा पलने लगी, और करीब 36वें हफ्ते में उसने एक स्वस्थ और सुंदर बच्ची के रूप में दोबारा इस दुनिया में जन्म लिया....."!

"इसीलिए इस नन्हीं बच्ची को दुनिया "Baby Born Twice" के नाम से जानती है....."।

नाइजीरिया के लागोस से निकलकर 

"दुनिया की सबसे एडवांस मेडिकल टीम को लीड करने वाले डॉ. ओलुतोए" का यह सफर हमें सिखाता है ;

कि "काबिलियत किसी देश या सरहद की कभी मोहताज नहीं होती"। 

"यह सिर्फ़ एक सर्जरी नहीं थी, बल्कि उस भरोसे की जीत थी, जो हम ईश्वर, इंसानियत और डॉक्टर्स पर करते हैं"।

 इस अद्भुत कारनामे और डॉक्टर ओलुतोए की इस महान सोच और कारनामें को कोटि-कोटि नमन......!