कोरिया बैकुंठपुर । शहर के प्रतिष्ठित ग़ज़लकार शैलेन्द्र श्रीवास्तव की ग़ज़लों की लोकप्रियता अब जिले और राज्य की सीमाओं से निकलकर देश-विदेश तक पहुंच रही है। उनकी रचनाओं को राष्ट्रीय स्तर के स्थापित एवं ख्यातिप्राप्त संगीतकारों और गायकों द्वारा अपनी-अपनी संगीतबद्ध प्रस्तुतियों के माध्यम से आवाज दी जा रही है। सोशल मीडिया सहित देश-दुनिया के विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर शैलेन्द्र की ग़ज़लों को श्रोताओं की खूब सराहना मिल रही है।

विगत कुछ वर्षों में शैलेन्द्र श्रीवास्तव द्वारा लिखी गई ग़ज़लों को मुंबई के शिव राजोरिया एवं ज्योत्सना राजोरिया, नासिक के संजय वत्सल, चंडीगढ़ के एम. मुसाफिर, दिल्ली के रुणित आर्य तथा छत्तीसगढ़ के रमेश गुप्ता सहित अनेक संगीतकारों और गायकों ने अपनी कम्पोजीशन में स्वर दिया है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर के कई अन्य संगीतकार एवं गायक भी शैलेन्द्र की ग़ज़लों को स्वरबद्ध करने के लिए चयनित कर चुके हैं।

शैलेन्द्र की रचनाओं की खासियत यह है कि उनकी ग़ज़लों में सामाजिक सरोकारों के साथ आम आदमी की पीड़ा, संघर्ष, संवेदनाओं और जीवन से जुड़े विभिन्न विमर्शों का बेहद मार्मिक एवं जीवंत चित्रण देखने को मिलता है। सहज, सरल और ग्राह्य शब्दों में कही गई उनकी ग़ज़लें पाठकों और श्रोताओं से सहज ही जुड़ाव स्थापित करती हैं। यही कारण है कि उनकी रचनाओं को संगीतकारों के साथ-साथ साहित्य एवं संगीत प्रेमियों के बीच भी लगातार पहचान मिल रही है।

शैलेन्द्र श्रीवास्तव और देश के प्रतिष्ठित संगीतकारों एवं गायकों की साझा प्रस्तुतियां सोशल मीडिया के फेसबुक, इंस्टाग्राम सहित अन्य माध्यमों पर श्रोताओं तक पहुंच रही हैं। इन प्रस्तुतियों को देश के अलावा विदेशों में भी पसंद किया जा रहा है। उनकी ग़ज़लों की बढ़ती लोकप्रियता जिले की साहित्यिक प्रतिभा और समृद्ध साहित्यिक परंपरा के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।

देशभर के अनेक प्रतिष्ठित मंचों एवं संस्थानों द्वारा विभिन्न सम्मान और पुरस्कारों से नवाजे जा चुके शैलेन्द्र श्रीवास्तव का नाम जिले की साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले रचनाकारों में प्रमुखता से लिया जाता है। उनकी ग़ज़लों को फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया माध्यमों पर आसानी से पढ़ा एवं सुना जा सकता है।